
आजमगढ़ में छात्राओं को साइबर अपराधों से बचाव के बताए तरीके, सोशल मीडिया की प्राइवेसी और पासवर्ड सुरक्षा पर दिया जोर

आजमगढ़। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत 28 अक्टूबर को अग्रसेन महिला महाविद्यालय, आजमगढ़ में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें छात्राओं को साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं को डिजिटल माध्यमों का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने, निजी जानकारी सुरक्षित रखने और किसी भी तरह के साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में थाना कोतवाली की चौकी प्रभारी बदरका एवं महिला उपनिरीक्षक शशी सिंह ने महिलाओं से संबंधित अपराधों और उनकी सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं को बताया कि किसी भी प्रकार की समस्या या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय संबंधित अधिकारियों से सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं को बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं सामने रखने और समय रहते पुलिस की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
वहीं, साइबर सेल आजमगढ़ के हेड कांस्टेबल ओमप्रकाश जायसवाल ने साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। अनजान व्यक्तियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, निजी तस्वीरें साझा करने और अपनी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करने से बचना चाहिए। छोटी-सी लापरवाही भी साइबर अपराधियों को निजी जानकारी का दुरुपयोग करने का मौका दे सकती है।
सोशल मीडिया की प्राइवेसी और पासवर्ड सुरक्षा पर जोर
साइबर सेल की ओर से छात्राओं को फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की प्राइवेसी सेटिंग्स के बारे में बताया गया। उन्हें अपनी प्रोफाइल को निजी रखने, पोस्ट और तस्वीरों की पहुंच सीमित करने तथा अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
छात्राओं को मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखने के साथ ही ओटीपी तथा अन्य गोपनीय जानकारियां किसी के साथ साझा नहीं करने के लिए जागरूक किया गया। अधिकारियों ने जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड करने या अविश्वसनीय ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए।
फर्जी आईडी और ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाव की जानकारी
कार्यक्रम में फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने, किसी अन्य व्यक्ति की तस्वीर का गलत इस्तेमाल करने और ऑनलाइन पहचान का दुरुपयोग करने जैसे मामलों पर भी चर्चा की गई। छात्राओं को साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर ब्लैकमेलिंग और निजी फोटो या वीडियो के दुरुपयोग जैसी समस्याओं के प्रति सतर्क किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से परेशान करता है या निजी तस्वीरों का दुरुपयोग कर ब्लैकमेल करने का प्रयास करता है, तो घबराने के बजाय संबंधित चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए। इसके बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पुलिस से शिकायत कर सहायता लेनी चाहिए।
ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए किया जागरूक
साइबर जागरूकता कार्यक्रम में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के विभिन्न तरीकों की भी जानकारी दी गई। छात्राओं को फर्जी केवाईसी अपडेट, नौकरी दिलाने, लोन दिलाने और लॉटरी के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की सलाह दी गई। उन्हें बताया गया कि साइबर अपराधी कई बार लोगों को झांसे में लेकर बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील विवरण साझा नहीं करना चाहिए।
पुलिस टीम ने छात्राओं को बताया कि यदि किसी के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो बिना देरी किए साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देनी चाहिए। इसके साथ ही भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर शिकायत करने से मामले में आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
छात्राओं की जिज्ञासाओं का किया समाधान
कार्यक्रम के अंत में छात्राओं ने साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल और ऑनलाइन अपराधों से संबंधित सवाल पूछे। साइबर सेल के हेड कांस्टेबल ओमप्रकाश जायसवाल ने उनके सवालों के जवाब देकर जिज्ञासाओं का समाधान किया। छात्राओं को डिजिटल माध्यमों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने, अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा करने और साइबर अपराध की स्थिति में बिना घबराए पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।
आजमगढ़ पुलिस की ओर से राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत विद्यार्थियों, महिलाओं और आमजन को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी देना और सुरक्षित डिजिटल वातावरण को बढ़ावा देना है।














