
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग

जौनपुर। स्वास्थ्य विभाग में कथित अनियमितताओं, तबादलों में पारदर्शिता की कमी, अवैध अस्पतालों एवं पैथोलाजी केंद्रों के संचालन, शव वाहनों की बदहाल व्यवस्था और जिला अस्पताल की मर्चरी की स्थिति को लेकर मंगलवार को अधिवक्ता विकास तिवारी एवं अतुल सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित विभिन्न खबरों के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। अधिवक्ताओं ने सीएमओ कार्यालय से जारी स्थानांतरण और संबद्धता आदेशों की निष्पक्ष जांच कराने, आदेशों के अनुपालन तथा संबंधित कर्मचारियों को कार्यमुक्त किए जाने की स्थिति की पड़ताल करने की मांग की। साथ ही कथित बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई गई।
ज्ञापन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बिना वैध पंजीकरण अथवा आवश्यक मानकों के संचालित अस्पतालों, क्लीनिकों, पैथोलाजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई। सरकारी चिकित्सकों द्वारा कथित अनधिकृत निजी प्रैक्टिस के मामलों की जांच कराने की मांग भी की गई।
अधिवक्ताओं ने जिला अस्पताल परिसर में खड़े शव वाहनों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर संचालित कराने तथा मर्चरी की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग की। मर्चरी के खराब उपकरणों, भवन की स्थिति और शवों के सम्मानजनक संरक्षण की व्यवस्था की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई।
इसके अलावा जिला अस्पताल परिसर में रखे सोलर पैनल, सर्जिकल बेड, आईसीयू उपकरण सहित अन्य चिकित्सकीय संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सरकारी संपत्ति के संभावित दुरुपयोग या क्षति की जांच की मांग की गई। ज्ञापन में पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
इस दौरान अंकित यादव, नीरज पाठक, चंद्रेश यादव, रंजीत यादव, देवेश मौर्य, निर्भय, वेदप्रकाश, आशीष, चंद्रपाल, नीरज यादव, शिवराज यादव, राहुल सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।








