खानापट्टी की रामलीला शुरू, नौ दशक से जीवंत है परंपरा

Share

जौनपुर। सिकरारा क्षेत्र के खानापट्टी गांव में करीब नौ दशक पुरानी रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। काशी नरेश की पहल से शुरू हुई यह रामलीला आज भी पारंपरिक शैली में आयोजित होती है। इसमें स्थानीय लोगों के साथ मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाले कलाकार भी छुट्टी लेकर गांव आते हैं और विभिन्न पात्रों का अभिनय करते हैं।

आजादी से पहले सिकरारा बाजार के पास ताहिरपुर गांव में काशी नरेश की छावनी थी। स्थानीय लोगों के आग्रह पर उन्होंने अपने खर्च से रामलीला का मंचन शुरू कराया था। आजादी के बाद खानापट्टी निवासी बृजमोहन सिंह और रामलखन सिंह ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।

बृजमोहन सिंह ने वर्ष 1954 में गांव के राधाकृष्ण मंदिर में रामलीला शुरू कराई। वर्ष 1961 में रामलीला मैदान के लिए जमीन उपलब्ध हुई। इसके बाद वर्ष 1976 में बैजनाथ कुंवरि ने अपने पति रामनाथ की स्मृति में रामलीला का मंच बनवाया। बाद में विनय कुमार सिंह और किरन सिंह ने ग्रामीणों के सहयोग से मंच का निर्माण कराया।

समय के साथ इस रामलीला ने अपनी अलग पहचान बनाई है। ग्रामीणों के सहयोग और कलाकारों की भागीदारी से यह परंपरा आज भी कायम है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का मंचन किया जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

SHARE THIS ARTICLE
ABOUT AUTHOR
Satyameva Jayate News
Satyameva Jayate News ✓
Satyameva Jayate News के लिए समाचार और विशेष रिपोर्ट प्रकाशित करते हैं।

🌤️ मौसम अपडेट

LIVE
मौसम की ताज़ा जानकारी लोड हो रही है…

🔮 आज का राशिफल

♈

मेष

आज का राशिफल लोड हो रहा है…

यह दैनिक राशिफल सामान्य ज्योतिषीय संकेतों पर आधारित है।

ताज़ा ख़बरें