जौनपुर। राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में “सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं समरसता सम्मान समारोह का आयोजन कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह में किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति को लेकर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
उत्तर प्रदेश सरकार के खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि गोरक्षपीठ सनातन धर्म और सामाजिक समरसता का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ ने केवल संदेश ही नहीं दिया बल्कि समाज में समरसता को व्यवहार में भी उतारा है।
विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह ‘प्रिंसू’ ने कहा कि संतों ने हमेशा समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए कार्य किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों का उल्लेख करते हुए समाज को जोड़ने वाली शक्तियों का समर्थन करने का आह्वान किया।

पूर्व सांसद एवं पूर्व एमएलसी विद्यासागर सोनकर ने कहा कि सामाजिक समरसता के बिना सनातन धर्म के उद्देश्यों की पूर्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत तभी विश्वगुरु बन सकता है जब समाज एकजुट होकर कार्य करे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामशीष ने कहा कि समाज में बढ़ती जातीय दूरियों को समाप्त करने के लिए नए सामाजिक सूत्र खोजने होंगे। वहीं गुरु रविदास जन्मस्थान वाराणसी के आचार्य भारत भूषण जी महाराज ने कहा कि धर्म की रक्षा तभी संभव है जब समाज के सभी वर्ग एक साथ आएं।
बारीनाथ मठ के महंत योगी हरदेवनाथ ने समरसता को त्याग और अपनत्व का प्रतीक बताते हुए वंचित वर्गों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया।

कार्यक्रम का आयोजन Blossom India Foundation द्वारा किया गया। संगोष्ठी के संयोजक एवं संस्था के संस्थापक शशि प्रकाश सिंह ने विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम का संचालन श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने किया।
इस दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 22 लोगों को “समरसता सम्मान” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।


