
मध्यस्थता से 39 साल पुराने मुकदमे का हुआ सौहार्दपूर्ण निस्तारण

प्रभुदेई बनाम शहदेव मामले में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से निकाला समाधान
जौनपुर, 2 नवंबर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर मध्यस्थता के माध्यम से करीब चार दशक पुराने मुकदमे का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराया गया। मूलवाद संख्या ओएस-126/1987 प्रभुदेई बनाम शहदेव में दोनों पक्षों ने आपसी मतभेद भुलाकर सौहार्दपूर्ण ढंग से विवाद का समाधान कर लिया।
सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुशील कुमार सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिले में एक अगस्त से 30 दिसंबर 2026 तक राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 चलाया जा रहा है। जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार शशि के निर्देश पर न्यायालयों में लंबित मामलों का मध्यस्थता के जरिए निस्तारण कराया जा रहा है।
इसी क्रम में अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पंचम की पीठासीन अधिकारी मेधा कुशवाहा के न्यायालय में विचाराधीन स्थायी निषेधाज्ञा से संबंधित मामले को सुलह-समझौता केंद्र भेजा गया था। मध्यस्थ मनोज कुमार वर्मा ने दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर विवाद के समाधान का प्रयास किया। उनके प्रयासों से दोनों पक्ष सहमति पर पहुंचे।
मामले के निस्तारण में दोनों पक्षों के अधिवक्ता कमलेश कुमार अग्रहरि और गोपी शंकर श्रीवास्तव ने सहयोग किया। प्राधिकरण के सचिव ने कहा कि मध्यस्थता से पुराने और लंबित विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। इससे पक्षकारों के आपसी संबंध भी मधुर बने रहते हैं।
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