जौनपुर। सीपीडीआरएस पूर्वी उत्तर प्रदेश कमेटी के इंचार्ज प्रमोद कुमार शुक्ल ने सेंटर फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स एंड सेक्युलरिज़्म (CPDRS) की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा आईटी एक्ट की धारा 69(A) के तहत “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) के सोशल मीडिया हैंडल और वेबसाइट को ब्लॉक किए जाने के फैसले की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने कहा कि एक जीवंत और स्वस्थ लोकतंत्र में इतनी परिपक्वता अवश्य होनी चाहिए कि वह व्यंग्य, हास्य और राजनीतिक कटाक्ष को सह सके, स्वीकार कर सके और उनसे संवाद कर सके। मुख्य रूप से छात्रों, युवाओं और डिजिटल रूप से जुड़े जेन-ज़ी द्वारा संचालित CJP का तेजी से वायरल होना कोई सशस्त्र विद्रोह नहीं, बल्कि बेरोजगारी, पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसी व्यवस्थागत समस्याओं को लेकर युवाओं की गहरी चिंता की व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति थी।
प्रमोद शुक्ल ने कहा कि लोकतंत्र का मूल आधार जनता के प्रति जवाबदेही है। युवाओं द्वारा किए गए डिजिटल व्यंग्य को राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा मानना प्रशासनिक अतिरेक को दर्शाता है। उन्होंने इसे अत्यंत चिंताजनक और दमनकारी कदम बताया।
उन्होंने आगे कहा कि इतिहास गवाह है कि युवाओं की वैध और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को दबाने से उन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता, जो असंतोष को जन्म देती हैं। राजनीतिक हास्य और व्यंग्य के मंचों को बंद करने का प्रयास यह संकेत देता है कि सत्तारूढ़ व्यवस्था युवाओं की निराशा के वास्तविक कारणों को संबोधित करने में न तो सक्षम है और न ही इच्छुक।
अंत में उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि ऐसे निरंकुश कदमों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाना राष्ट्र और प्रदेश हित में आवश्यक है।


