दो माह पूर्व आंधी में जड़ समेत गिरा था विशाल पीपल, रविवार सुबह सीधा देख उमड़ी भीड़; रहस्य बना कौतूहल का विषय
बरसठी | क्षेत्र के चतुर्भुजपुर गांव से निकुम्भनपुर जाने वाले मार्ग पर रविवार सुबह एक ऐसा नजारा लोगो को देखने में मिला, जिसने पूरे इलाके को हैरत में डाल दिया। दो माह पूर्व आई भीषण आंधी में जड़ समेत उखड़कर गिरा करीब सौ वर्ष पुराना विशाल पीपल का वृक्ष अचानक सीधा खड़ा दिखाई दिया। सुबह जब ग्रामीणों की नजर उस पर पड़ी तो देखते ही देखते मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने वृक्ष को ‘पिपलेश्वर’ का नाम देते हुए जयकारे लगाने शुरू कर दिए। वहीं इस अनोखी घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।

ग्रामीणों के अनुसार 13 मई को आई तेज आंधी में विशाल पीपल का पेड़ जड़ समेत उखड़कर गिर गया था। गिरने से गांव निवासी गिरजा शंकर दुबे समेत आसपास के कई मकानों को नुकसान पहुंचा और सड़क भी बाधित हो गई थी। बाद में ग्रामीणों ने मिलकर पेड़ की अधिकांश शाखाएं काटकर रास्ता साफ कराया, लेकिन तना और जड़ें अत्यधिक विशाल होने के कारण वहीं छोड़ दी गईं। लोगों का कहना है कि बाद में उसे जेसीबी अथवा क्रेन की मदद से हटाने की योजना थी। ग्रामीणों का दावा है कि शनिवार देर शाम तक पेड़ जमीन पर ही पड़ा था, लेकिन रविवार सुबह वही विशाल तना जड़ों के सहारे सीधा खड़ा दिखाई दिया। यह कब और कैसे खड़ा हुआ, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

मकान मालिक गिरजा शंकर दुबे ने बताया कि आंधी में पेड़ उनके मकान पर गिरने से उसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। पेड़ की शाखाएं काट दी गई थीं, लेकिन तना और जड़ों को हटाया नहीं जा सका था। अब उसी पेड़ का दोबारा खड़ा दिखाई देना उन्हें भी आश्चर्यचकित कर रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों की धार्मिक आस्था और प्रबल हो गई। कई लोगों ने इस पीपल को ‘पिपलेश्वर’ नाम देते हुए इसे दैवीय संकेत माना और जयकारे लगाने लगे। वहीं कुछ ग्रामीणों का मानना है कि इसके पीछे कोई प्राकृतिक अथवा अन्य कारण भी हो सकता है। फिलहाल सच्चाई चाहे जो भी हो लेकिन विशाल पीपल के वृक्ष का रातोंरात दोबारा खड़ा होने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। इस अनोखी घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में कौतूहल का विषय बना हुआ है लोग अपने-अपने स्तर से तर्क देकर इसकी अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं।


