जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की शोध परियोजनाओं के मूल्यांकन प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब शोध परियोजनाओं का मूल्यांकन 100 अंकों के आधार पर किया जाएगा। साथ ही यूजीसी-केयर या पीयर रिव्यू जर्नल में शोध पत्र प्रकाशित करने वाले विद्यार्थियों को अतिरिक्त अंक देने का भी प्रावधान किया गया है।
इस संबंध में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने सभी शिक्षण विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि स्नातकोत्तर प्रथम और द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों की मुख्य शोध परियोजनाओं का मूल्यांकन विश्वविद्यालय द्वारा नामित परीक्षक मंडल के माध्यम से कराया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार मूल्यांकन समिति में शोध पर्यवेक्षक के साथ एक बाह्य परीक्षक भी शामिल रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि बाह्य परीक्षक की सहभागिता से मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और गुणवत्ता आधारित बन सकेगी।
डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि यदि कोई छात्र या छात्रा अपने स्नातकोत्तर अध्ययन के दौरान यूजीसी-केयर अथवा पीयर रिव्यू सूचीबद्ध जर्नल में अपने शोध कार्य से संबंधित शोध पत्र प्रकाशित कराता है, तो उसे शोध परियोजना के मूल्यांकन में 25 अंक तक अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा। हालांकि कुल प्राप्तांक 100 से अधिक नहीं माने जाएंगे।
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि शोध परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए नियुक्त बाह्य परीक्षकों को स्नातकोत्तर स्तर की प्रायोगिक परीक्षाओं में निर्धारित मानदेय के अनुरूप पारिश्रमिक दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस नई मूल्यांकन प्रणाली का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में शोध संस्कृति को बढ़ावा देना, अकादमिक गुणवत्ता में सुधार लाना तथा उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध प्रकाशनों के लिए प्रोत्साहित करना है। सभी विभागों और महाविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि नई व्यवस्था का प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।


