जौनपुर। जिले में अब पोस्टमार्टम के लिए मृतकों के परिजनों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जिला प्रशासन ने पोस्टमार्टम व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब 24 घंटे पोस्टमार्टम की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और डॉक्टरों की तैनाती तीन शिफ्टों में सुनिश्चित की जाएगी।
नई व्यवस्था के अनुसार मेडिकल ऑफिसर इन-चार्ज (एमओआईसी) को भी पोस्टमार्टम कार्य में शामिल होना अनिवार्य होगा। इससे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में तेजी आएगी और लंबित मामलों का निस्तारण समय पर किया जा सकेगा। प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
अब तक जिले में पोस्टमार्टम के लिए केवल दो शिफ्टों में डॉक्टर उपलब्ध रहते थे। ऐसे में कई बार शवों के पोस्टमार्टम में देरी हो जाती थी और परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। विशेष रूप से छुट्टियों और अधिक मामलों के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती थी।
जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन ने बताया कि कई मामलों में पीड़ित परिवारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार पुलिस स्तर पर पंचनामा की प्रक्रिया पूरी होने में देरी होने से पोस्टमार्टम प्रभावित होता है। इसे देखते हुए सभी थानाध्यक्षों को समयबद्ध तरीके से पंचनामा की कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी निर्देशित किया है कि तीनों शिफ्टों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया निर्बाध रूप से चल सके। हालांकि रात के समय पोस्टमार्टम केवल विशेष परिस्थितियों में और जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ही कराया जाएगा।
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बरतने और अनावश्यक विलंब से बचने को कहा है। अधिकारियों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि शोकाकुल परिवारों को भी समय पर राहत मिल सकेगी।


