जौनपुर।
जौनपुर ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी द्वारा ‘रेसिस्टेंट पीसीओएस’ विषय पर आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) में जिले के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने इस जटिल अंतःस्रावी विकार के विभिन्न आयामों पर गहन वैज्ञानिक चर्चा करते हुए आधुनिक, एविडेंस-बेस्ड एवं परिणामोन्मुख उपचार पद्धतियों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. अंजू कन्नौजिया ने की, जबकि संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी सचिव डॉ. शैलि निगम ने संभाली। मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक तांबे ने अपने विस्तृत एवं शोध-आधारित व्याख्यान के माध्यम से ‘रेसिस्टेंट पीसीओएस’ के क्लिनिकल मैनेजमेंट की जटिलताओं को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
अपने वैज्ञानिक संबोधन में डॉ. प्रतीक तांबे ने ‘रेसिस्टेंट पीसीओएस’ को एक मल्टीफैक्टोरियल एवं मेटाबोलिक-हॉर्मोनल डिसऑर्डर बताते हुए इसके मूल कारणों इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाइपरएंड्रोजेनिज़्म, ओवेरियन डिसफंक्शन एवं मेटाबोलिक असंतुलन के समेकित मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक उपचार से आगे बढ़ते हुए इंडिविजुअलाइज्ड, पेशेंट-सेंट्रिक एवं एविडेंस-बेस्ड ट्रीटमेंट मॉडल, लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन, वेट मैनेजमेंट तथा लॉन्ग-टर्म फॉलो-अप इस रोग के प्रभावी नियंत्रण की कुंजी हैं।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अंजू कन्नौजिया ने कहा कि ऐसे वैज्ञानिक मंच चिकित्सकों को नवीनतम क्लिनिकल गाइडलाइंस एवं उपचार प्रोटोकॉल से अवगत कराने के साथ-साथ रोगियों के लिए बेहतर, सुरक्षित और परिणामकारी चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. अंजू कन्नौजिया, सचिव डॉ. शैलि निगम, वाइस प्रेसिडेंट डॉ. अम्बर खान सहित डॉ. शुभा सिंह, डॉ. शिल्पी सिंह, डॉ. बीना त्रिपाठी, डॉ. शिखा शुक्ला, डॉ. जया राय, डॉ. रीता दुबे तथा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मधु शारदा, डॉ. शकुंतला यादव, डॉ. स्मिता श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सभी प्रतिभागी चिकित्सकों ने कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक, व्यावहारिक एवं दैनिक क्लिनिकल प्रैक्टिस के लिए उपयोगी बताया।
अंत में सभी उपस्थित विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।

