पूर्व प्रधानाचार्य, ज्योतिषाचार्य एवं व्याकरणाचार्य के निधन से शिक्षा जगत को अपूरणीय क्षति
जौनपुर। जनपद के प्रख्यात विद्वान, ज्योतिषाचार्य एवं व्याकरणाचार्य पंडित वाचस्पति मिश्र का 80 वर्ष की आयु में 21 मई 2026 की सायं लगभग 5 बजे निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही शिक्षा जगत, सामाजिक क्षेत्र और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संवेदना व्यक्त की।
पंडित वाचस्पति मिश्र विकास खंड बक्शा के ग्राम नरी, पोस्ट खुनशापुर के निवासी थे। वे लंबे समय तक जूनियर हाईस्कूल पूरामोहब्बत में प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत रहे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के साथ-साथ ज्योतिष और संस्कृत व्याकरण के गहन ज्ञान के कारण उन्हें क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त था। उनके व्यक्तित्व और विद्वता का प्रभाव कई पीढ़ियों पर रहा।
स्वर्गीय पंडित वाचस्पति मिश्र अपने पीछे एक समृद्ध पारिवारिक विरासत छोड़ गए हैं। उनके बड़े पुत्र डॉ. माहेश्वर मिश्र तथा दूसरे पुत्र डॉ. हुताशन मिश्र चिकित्सक हैं, जबकि छोटे पुत्र डॉ. मृत्युंजय मिश्र नगर के राज कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। परिवार में उनके पौत्र ब्रह्मयज्ञ मिश्र, भास्कर मिश्र, भुवनेश्वर मिश्र एवं विनायक मिश्र भी हैं।
उनका अंतिम संस्कार वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। उनके छोटे पुत्र डॉ. मृत्युंजय मिश्र ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में परिजन, रिश्तेदार, शिक्षाविद् और क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पंडित वाचस्पति मिश्र के निधन को क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके ज्ञान, सादगी और शिक्षा के प्रति समर्पण को लोग लंबे समय तक स्मरण करते रहेंगे।


