• Tue. Jun 23rd, 2026

    70 फीसदी बीएड कॉलेजों में अनुमोदित शिक्षक नहीं, शिक्षा की गुणवत्ता पर उठे सवाल

    VBSPU
    Share

    जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध जौनपुर और गाजीपुर के करीब 70 प्रतिशत बीएड महाविद्यालयों में वर्षों से विश्वविद्यालय से अनुमोदित शिक्षक नहीं हैं। इसके बावजूद प्रवेश, परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया नियमित रूप से संचालित हो रही है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता और व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    नियमों के अनुसार प्रत्येक बीएड महाविद्यालय में निर्धारित संख्या में योग्य एवं विश्वविद्यालय से अनुमोदित शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है, लेकिन बड़ी संख्या में संस्थानों में यह व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित बताई जा रही है।

    आरोप है कि वर्षों से शिक्षक अनुमोदन का मामला लंबित है, लेकिन न तो प्रभावी जांच हुई और न ही किसी संस्थान के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि महाविद्यालयों में अनुमोदित शिक्षक ही नहीं हैं तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल रही है और शैक्षणिक मानकों की निगरानी कौन कर रहा है।

    इस स्थिति में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा है तो प्रवेश, परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया किस आधार पर संचालित की जा रही है। छात्र नियमित रूप से फीस जमा कर रहे हैं, परीक्षाएं दे रहे हैं और डिग्रियां भी प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी का मुद्दा वर्षों से जस का तस बना हुआ है। इससे बीएड शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।

    इस संबंध में विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि जिन बीएड महाविद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं अथवा उनका अनुमोदन लंबित है, वे नियमानुसार शीघ्र अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You missed