जौनपुर। जश्ने यौमुन्न नबी एवं मदहे सहाबा का ऐतिहासिक जुलूस बुधवार को शहर में अपनी पुरानी रवायत और शानोशौकत के साथ निकाला गया। पिछले करीब 126 वर्षों से आयोजित हो रहे इस जुलूस में बड़ी संख्या में अंजुमनों, अखाड़ों और विभिन्न समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया। पूरी रात शहर में नात, धार्मिक संदेशों और अखाड़ों के करतबों का सिलसिला चलता रहा।
इस्लाम धर्म के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित जुलूस में विभिन्न अंजुमनों ने नात पेश की। वहीं अलग-अलग अखाड़ों के सदस्यों ने अपने पारंपरिक करतब दिखाकर लोगों का मनोरंजन किया। जुलूस को मुख्य अतिथि अंसार अहमद और केंद्रीय सीरत कमेटी के अध्यक्ष ओबैदा शिराजी खान ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जुलूस ओलंदगंज से शुरू होकर शाही पुल, चहारसू, किदवई पार्क, कोतवाली चौराहा स्थित कंट्रोल रूम, अल्फस्टीनगंज होते हुए शाही अटाला मस्जिद पहुंचा। यहां जुलूस एक जलसे में परिवर्तित हो गया। रास्ते में विभिन्न संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की ओर से स्टॉल लगाकर लोगों के लिए पानी, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई। विभिन्न स्थानों पर मंच लगाकर अंजुमनों और अखाड़ों को पुरस्कृत कर उनकी हौसला अफजाई भी की गई।
पूरी रात जलसे और जुलूस में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और विभिन्न समुदायों के लोगों की मौजूदगी रही। कार्यक्रम के दौरान कौमी एकता और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी दिया गया।
कौमी एकता सम्मेलन में दिया भाईचारे का संदेश
शाही अटाला मस्जिद में आयोजित कौमी एकता सम्मेलन की अध्यक्षता मौलाना अनवार कासमी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत यासिर एहसान ने कलाम-ए-इलाही से की, जबकि संचालन अबु अकरम कासमी ने किया।
मुख्य वक्ताओं ने हजरत मोहम्मद के जीवन और उनके संदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके आगमन से पहले समाज में अनेक सामाजिक बुराइयां व्याप्त थीं। बेटियों को जन्म लेते ही जिंदा दफन करने जैसी कुरीतियां, शराबखोरी और आपसी रंजिश के कारण होने वाले संघर्षों से समाज परेशान था। पैगंबर हजरत मोहम्मद ने मानवता, भाईचारे, शांति और बुराइयों से दूर रहने का संदेश दिया।
वक्ताओं ने कहा कि समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करना ही ऐसे आयोजनों का उद्देश्य होना चाहिए। कार्यक्रम में कौमी एकता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे मौजूद
कौमी एकता सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में सपा नेता अंसार अहमद, जावेद सिद्दीकी, डॉ. सरफराज खान, दानिश खान और मोहम्मद अयान मौजूद रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय सीरत कमेटी के अध्यक्ष ओबैदा शिराजी, जनरल सेक्रेटरी इम्तियाज अहमद रज्जू, हसीन बबलू, अंसार खान, फिरोज अहमद पप्पू, मोहम्मद फराज खान, फरहान शेख, अबु हुजैफा खान, मोहम्मद सादिक, मोहम्मद आमिर, रियाजुल हक, नुरुद्दीन मंसूरी, अकरम मंसूरी, अब्दुल सलाम, ताज मोहम्मद, दिलदार अहमद, अनवारुल हक गुड्डू, हफीज शाह, शम्स तबरेज, सद्दाम हुसैन, मास्टर मेराज, फिरोज गांधी, साजिद अलीम, आरिफ हबीब, अमजद अली, कमालुद्दीन अंसारी, मेराज अहमद, ताज शोबी कादरी, सेराज सिद्दीकी, अलमास सिद्दीकी, नेयाज ताहिर शेखू, जावेद अजीम, राजा नवाब, मोहम्मद शोएब अच्छू खां, हाजी इमरान, लारैब लियाकत, साहेबे आलम, अरशद कुरैशी, इमरान बंटी, साजिद अनवार, अनवारुल हक अनवार जौनपुरी, निखलेश सिंह सहित अन्य पदाधिकारी और लोग मौजूद रहे।


