
निर्वाचन आयोग का अधिकारी बनकर महिला बीएलओ से ₹81 हजार की साइबर ठगी

पुलिस ने पूरी रकम वापस कराई
आजमगढ़। साइबर अपराधियों ने निर्वाचन आयोग का अधिकारी बनकर एक महिला बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) को ऑनलाइन बैठक में शामिल होने के नाम पर झांसे में लिया और उनके बैंक खाते से ₹81 हजार रुपये निकाल लिए। ठगी का एहसास होने पर पीड़िता ने साइबर सेल आजमगढ़ में शिकायत दर्ज कराई। साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से ठगी गई पूरी धनराशि पीड़िता के बैंक खाते में वापस करा दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जीयनपुर थाना क्षेत्र के मसोना गांव निवासी श्रीमती सुमन राजभर पत्नी विजय शंकर बीएलओ के पद पर कार्यरत हैं। निर्वाचन संबंधी कार्य के दौरान उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को निर्वाचन आयोग का वरिष्ठ अधिकारी बताया और ऑनलाइन बैठक के नाम पर उनके व्हाट्सएप पर एक संदिग्ध लिंक भेजा। सरकारी कामकाज से जुड़ा मामला समझकर महिला ने लिंक खोल लिया। इसके बाद साइबर ठग ने महिला का मोबाइल स्क्रीन शेयर करवाया और पेटीएम वॉलेट के माध्यम से कुछ प्रक्रिया पूरी कराई। इसी दौरान यूपीआई के जरिए उनके बैंक खाते से ₹81,000 रुपये दूसरे खाते में स्थानांतरित कर लिए गए। खाते से रकम निकलने के बाद महिला को साइबर ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत साइबर सेल आजमगढ़ में दर्ज कराई।
साइबर सेल ने बैंक और पेमेंट गेटवे से किया समन्वय
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक यातायात एवं साइबर अपराध के नोडल अधिकारी पंकज श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में साइबर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत साइबर सेल की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया। टीम ने तत्काल संबंधित बैंक और पेमेंट गेटवे से संपर्क कर ठगी की रकम को होल्ड और फ्रीज कराने की कार्रवाई की। इसके बाद आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी कराकर पीड़िता की ठगी गई पूरी धनराशि ₹81,000 रुपये उनके मूल बैंक खाते में वापस करा दी गई। अपनी पूरी रकम वापस मिलने पर महिला बीएलओ ने आजमगढ़ पुलिस और साइबर सेल की टीम के प्रति आभार जताया। इस कार्रवाई में साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक रवि प्रकाश गौतम, मुख्य आरक्षी ओमप्रकाश जायसवाल, आरक्षी अमित कुमार सरोज और आरक्षी जयप्रकाश प्रजापति शामिल रहे।
अनजान लिंक खोलने और स्क्रीन शेयर करने से बचें
आजमगढ़ पुलिस ने जनपदवासियों और सरकारी कर्मचारियों से साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी सरकारी अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्थान का प्रतिनिधि बनकर फोन कर सकते हैं। ऑनलाइन बैठक, निर्वाचन संबंधी कार्य या अन्य सरकारी प्रक्रिया का हवाला देकर संदिग्ध लिंक भेजना ठगी का तरीका हो सकता है। पुलिस ने सलाह दी है कि अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए लिंक न खोलें और किसी के कहने पर मोबाइल की स्क्रीन शेयर न करें। सरकारी अधिकारी के नाम पर आने वाली संदिग्ध कॉल की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से अवश्य करें। यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है, तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने और वापस पाने की संभावना बढ़ सकती है।








