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    सड़क हादसे ने उजाड़ा घर, बुढ़ापे में मां का इकलौता सहारा छिना

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    बरसठी, जौनपुर। जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी शायद वही होती है, जब बुढ़ापे में मां के कंधों से बेटे का सहारा छिन जाए।ऐसे ही करुण दृश्य ने पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। थाना क्षेत्र के बेलौनाकला (बबूरीगांव) गांव में सड़क हादसे की खबर पहुंचते ही एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गईं।
    बीते बुधवार को महाराष्ट्र के मीरा भायंदर क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में गांव निवासी स्वर्गीय रामनरेश सिंह उर्फ नाटे के 38 वर्षीय इकलौते पुत्र अवनीश सिंह उर्फ चिंटू की मौत हो गई। हादसे में उनकी पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनका उपचार जारी है।बताया जा रहा है कि अवनीश अपनी पत्नी के साथ बाइक से कहीं जा रहे थे, तभी तेज रफ्तार चार पहिया वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि अवनीश के सिर में गंभीर चोटें आईं। मौके पर पहुंची महाराष्ट्र पुलिस ने दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने अवनीश को मृत घोषित कर दिया। जैसे ही यह मनहूस खबर गांव पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। घर पर कोहराम मच गया और परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा। 75 वर्षीय वृद्ध मां बेटे की मौत की खबर सुनते ही बेसुध हो गईं। पति का साया लगभग 12 वर्ष पूर्व उठ चुका था, अब बुढ़ापे का इकलौता सहारा भी छिन गया। मां बार-बार बेटे को याद कर रो पड़ती हैं, उनका करुण रुदन हर किसी का दिल दहला देता है। अवनीश पांच बहनों के इकलौते भाई थे। सभी बहनों की शादी हो चुकी है। परिवार पहले भी गहरे दुख से गुजर चुका था, जब करीब तीन वर्ष पूर्व अवनीश कि पुत्री की रेबीज से मौत हो गई थी। अब इस हादसे ने पूरे परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। पीछे वृद्ध मां, पत्नी और 14 वर्षीय पुत्र आर्यन रह गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार अवनीश मिलनसार और जिम्मेदार स्वभाव के व्यक्ति थे। वह मुंबई में एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे और मेहनत कर परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे थे। उनके निधन की खबर से गांव में हर आँखे नम है।

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