जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के वैलनेस सेंटर ने “साथी” नामक नई पहल शुरू की है। बुधवार को कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने वैलनेस सेंटर द्वारा संचालित इस अभियान का जागरूकता पोस्टर जारी किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के सामने केवल शैक्षणिक चुनौतियाँ ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक दबाव भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय का दायित्व है कि वह विद्यार्थियों को सुरक्षित, संवेदनशील और भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराए। कहा कि स्वस्थ मन ही बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की नींव है। विश्वविद्यालय चाहता है कि हर छात्र स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और समर्थ महसूस करे।
वैलनेस सेंटर के समन्वयक एवं व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजय प्रताप सिंह ने बताया कि जारी किए गए पोस्टर में विद्यार्थियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे मानसिक तनाव, अवसाद, भय या किसी भी प्रकार की परेशानी को मन में दबाने के बजाय साझा करें।
पोस्टर में परीक्षा और करियर का दबाव, असफलता का डर, घर की याद, रिश्तों में तनाव, साइबर बुलिंग तथा भविष्य को लेकर चिंता जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है, जिनसे आज बड़ी संख्या में युवा प्रभावित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय की “साथी” पहल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को समय पर परामर्श, भावनात्मक सहयोग और पेशेवर सहायता उपलब्ध कराना है। इस पोस्टर को सोशल मीडिया के साथ ही साथ छात्रावासों के सभी कमरों, अध्ययन कक्षों एवं विभागों के डिस्प्ले बोर्ड पर लगाया जायेगा।
वैलनेस सेंटर की नोडल अधिकारी डॉ. अन्नू त्यागी ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा पोस्टर में यह भी भरोसा दिलाया गया है कि विद्यार्थियों की सभी बातचीत पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी तथा उन्हें बिना किसी भेदभाव और पूर्वाग्रह के सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग एवं वैलनेस सेंटर के विशेषज्ञों की टीम लगातार कार्य कर रही है।
विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों की मानसिक समस्याओं से जुड़ी सहायता के लिए विश्वविद्यालय हेल्पलाइन नंबर +91 7518200147 जारी किया है। इसके अलावा विद्यार्थी टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 / 1-800-891-4416 तथा किरण हेल्पलाइन 1800-599-0019 पर भी संपर्क कर सकते हैं। साथ ही साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 भी पोस्टर में दिए गए हैं।


