लखनऊ। बुधवार को समावेशी साहित्य संस्थान के तत्वाधान में प्रख्यात साहित्यकार एवं पुलिस महानिरीक्षक डाॅ.अखिलेश निगम ‘अखिल’ की दो पुस्तकों ‘अपने अपने तर्क’ एवं ‘अखिल का साहित्य मनन एवं मूल्यांकन’ का भव्य लोकार्पण उ०प्र० हिन्दी संस्थान के निराला सभागार में सम्पन्न हुआ और साथ ही समावेशी साहित्य संस्थान का स्थापना दिवस मनाया गया एवं संस्था के शुभंकर को भी लोकार्पित किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में विनोद कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी० ने डाॅ.अखिलेश निगम के विभागीय कार्यों के साथ-साथ साहित्य सर्जन की विलक्षण क्षमता की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि विभागीय व्यस्तता के बीच साहित्य लेखन के लिए समय निकालना बहुत कठिन है। विशिष्ट अतिथि के रूप में आशुतोष कुमार अपर पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी० ने अखिल के व्यक्तित्व और साहित्य दोनों की चर्चा करते हुए उनके अहंकार शून्य व्यक्तित्व की प्रशंसा किए। ओडिशा से पधारे उमेश कुमार प्रजापति ‘अलख’ ने नवगठित समावेशी साहित्य संस्थान की स्थापना के लक्ष्य के लक्ष्य एवं उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी एवं प्रो० योगेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व विशेष सचिव डॉ० दिनेश अवस्थी, डॉ० अमिता दूबे, तरूण प्रकाश ने लोकर्पित होने वाली पुस्तकों की सारगर्भित समीक्षा की। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ, बंशराज यादव, कवि एवं एडीशनल डीसीपी मध्य ज़ोन पुलिस कमिश्नरेट जितेन्द्र कुमार दुबे, इं. सुनील कुमार बाजपेई, स्वाति पाण्डेय प्रीत,प्रमोद द्विवेदी, नीता निगम, कुशाग्र निगम, देवांश निगम,अमृतांश निगम,डाॅ.शोभा दीक्षित भावना, अश्वनी तिवारी उपस्थित रहे।


