
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस : डॉ. हरिनाथ यादव ने मानसिक रोगों के बढ़ते खतरे और उपचार पर दी जानकारी

जौनपुर में श्री कृष्णा न्यूरो एंड मेंटल हेल्थ क्लिनिक में हुआ जागरूकता कार्यक्रम
डॉ. प्रतिमा यादव ने समझाई मनोवैज्ञानिक परामर्श और व्यवहार चिकित्सा की भूमिका
यूपी बोर्ड परीक्षा 2027 का कार्यक्रम जारी, पांच फरवरी से शुरू होंगी हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएंजौनपुर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शहर के श्री कृष्णा न्यूरो एंड मेंटल हेल्थ क्लिनिक में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मानसिक बीमारियों के लक्षण, उनके कारण, बचाव और उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को मानसिक रोगों के प्रति जागरूक करना, समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में क्लिनिक के संस्थापक एवं वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. हरिनाथ यादव ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं आज दुनिया भर में गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। तनाव, बदलती जीवनशैली, पारिवारिक समस्याएं, काम का दबाव और सामाजिक परिस्थितियां व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। मानसिक परेशानियों को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से व्यक्ति की दिनचर्या, पारिवारिक संबंधों और कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
डॉ. यादव ने अवसाद, घबराहट, नशे की लत और अन्य मानसिक विकारों के बारे में बताते हुए कहा कि मानसिक बीमारी भी अन्य बीमारियों की तरह पहचान और उपचार की मांग करती है। इसे कमजोरी समझना या छिपाना उचित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति में लंबे समय तक उदासी, बेचैनी, नींद में बदलाव, काम में रुचि की कमी, अत्यधिक चिंता या व्यवहार में असामान्य परिवर्तन दिखाई दें तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में मनोचिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारियों के प्रति सामाजिक कलंक और अंधविश्वास उपचार में बड़ी बाधा बनते हैं। कई लोग इस डर से अपनी परेशानी नहीं बताते कि समाज या परिवार के लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। इसके कारण वे समय पर उपचार नहीं करा पाते और समस्या बढ़ सकती है। परिवार के सदस्यों को चाहिए कि वे मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति की बात धैर्यपूर्वक सुनें, उसके प्रति सहयोगात्मक व्यवहार रखें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
डॉ. हरिनाथ यादव ने अवसाद और घबराहट जैसी समस्याओं के प्रति विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का असर व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। लगातार तनाव और मानसिक परेशानी जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है। नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, शारीरिक गतिविधि, परिवार के साथ संवाद और तनाव प्रबंधन की आदतें मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, गंभीर या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में केवल जीवनशैली में बदलाव पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
मानसिक रोगियों के उपचार में परामर्श की अहम भूमिका
कार्यक्रम के अगले चरण में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रतिमा यादव ने मानसिक समस्याओं के उपचार में मनोवैज्ञानिक परामर्श और व्यवहार चिकित्सा की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के उपचार में दवाओं के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक उपचार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मरीज की समस्या, लक्षणों और आवश्यकताओं के अनुसार उपचार की पद्धति निर्धारित की जाती है।
डॉ. प्रतिमा यादव ने व्यवहार चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक परामर्श के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि कई बार व्यक्ति नकारात्मक विचारों, भय, चिंता और भावनात्मक उलझनों के कारण अपनी समस्याओं का सामना करने में कठिनाई महसूस करता है। ऐसे में प्रशिक्षित विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में परामर्श और उपयुक्त मनोवैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से उसे अपनी भावनाओं को समझने, विचारों में सकारात्मक बदलाव लाने और परिस्थितियों से बेहतर ढंग से निपटने में सहायता मिल सकती है।
उन्होंने मरीजों के परिजनों को भी जागरूक करते हुए कहा कि मानसिक बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को ताने देने, दोषी ठहराने या उसकी परेशानी को छोटा समझने के बजाय सहयोग देना चाहिए। उपचार के दौरान मरीज की बात सुनना, उसे समय देना और चिकित्सक की सलाह का पालन करने में मदद करना महत्वपूर्ण है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार में मरीज, परिवार और विशेषज्ञ के बीच बेहतर संवाद उपयोगी साबित हो सकता है।
समय पर उपचार और जागरूकता पर दिया जोर
संगोष्ठी में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को छिपाने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण लोग कई बार सामान्य मानसिक परेशानी और गंभीर लक्षणों के बीच अंतर नहीं कर पाते। ऐसे में सही जानकारी उपलब्ध कराना और जरूरतमंद लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि मानसिक बीमारी किसी व्यक्ति के चरित्र या इच्छाशक्ति की कमजोरी का प्रमाण नहीं है। उचित उपचार, परामर्श और परिवार के सहयोग से अनेक मानसिक समस्याओं को नियंत्रित करने तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है। लोगों से अपील की गई कि वे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनें और जरूरत पड़ने पर बिना संकोच विशेषज्ञ की सहायता लें।
इस अवसर पर डॉ. हरिनाथ यादव और डॉ. प्रतिमा यादव के साथ क्लिनिक के स्टाफ सदस्य डॉ. सुशील, नितिन, लालजी और शिव बहादुर सहित नर्सिंग स्टाफ, बड़ी संख्या में मरीज तथा उनके परिजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, श्रोताओं, मरीजों और उनके परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने और समय पर उपचार के महत्व का संदेश दिया गया।







