लखनऊ/जौनपुर। उत्तर प्रदेश में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए निजी दस्तावेज जुटाने की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। भाकपा के प्रदेश सचिव जय प्रकाश सिंह का दावा है कि 17 अगस्त की रात से प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिसकर्मी वामपंथी दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के घर पहुंचकर निजी दस्तावेज जमा करने का दबाव बना रहे हैं।
पार्टी के अनुसार, कई स्थानों पर पुलिसकर्मी देर रात 12 से 1 बजे के बीच कार्यकर्ताओं के घर पहुंचे। आरोप है कि लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) के अधिकारी फोन के माध्यम से भी आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की प्रतियां और वंशावली समेत अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कह रहे हैं।
भाकपा का आरोप है कि यह कार्रवाई किसी लिखित आदेश, नोटिस या पूर्व सूचना के बिना की जा रही है। पार्टी ने दावा किया कि कुछ कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। भाकपा ने पुलिस की इस कथित कार्रवाई को अनुचित, गैर-कानूनी और निंदनीय बताया है।
पार्टी ने कहा कि वामपंथी दल राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक संगठन हैं और उनका स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक 100 वर्षों से अधिक का इतिहास रहा है। इनके नेता और कार्यकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय रहे हैं। पार्टी का कहना है कि कई राज्यों में वामपंथी दलों की सरकारें भी रही हैं।
भाकपा ने सवाल उठाया कि पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और वंशावली जैसी निजी जानकारी मांगने का कानूनी आधार क्या है। पार्टी ने इसे नागरिकों की निजता के अधिकार से जोड़ते हुए कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।
भाकपा ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई विपक्षी आवाजों और नागरिक अधिकारों को दबाने का प्रयास है। पार्टी ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहां नागरिकों को संविधान द्वारा मौलिक अधिकार दिए गए हैं और देश में कानून का राज है, तानाशाही नहीं।


