
संस्थान के विकास के लिए त्याग, समर्पण जरूरीः प्रो. आर.के. सिंह

छात्रों की उपलब्धियां और शिक्षकों की टीम भावना से पीयू को मिलेगी नई ऊंचाई
जौनपुर । विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में बुधवार सुबह कुलपति प्रो. आर.के. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं समग्र विकास को लेकर शिक्षक और संविदा शिक्षकों के संग महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में कुलपति ने कहा कि किसी भी संस्थान की पहचान वहां के छात्रों, उनकी उपलब्धियों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों से होती है। विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए शिक्षकों में टीम भावना, सहयोग और संस्थान के प्रति समर्पण की भावना आवश्यक है।
कुलपति ने कहा कि सहायक प्रोफेसर सहित प्रत्येक शिक्षक को संस्थान की उन्नति में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। विश्वविद्यालय के विकास के लिए समय की बाध्यता से परे जाकर कार्य करने, नई पहल करने और जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान को आगे बढ़ाने के लिए त्याग, समर्पण और निरंतर प्रयास अनिवार्य हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालय के उपलब्ध संसाधनों का विद्यार्थियों के हित में अधिकतम उपयोग करने पर बल दिया। कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के संसाधनों और विद्यार्थियों की प्रतिभा को उद्योग जगत से जोड़कर आर्थिक मजबूती की दिशा में भी कार्य किया जा सकता है। उद्योगों, संस्थानों और अन्य व्यावसायिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
प्रो. सिंह ने कहा कि जेपीएल के माध्यम से की जा रही पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच उत्साहपूर्ण वातावरण तैयार करना और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी पहलों से ही बड़े परिवर्तन की नींव रखी जाती है। विद्यार्थियों में उत्साह, नवाचार और सहभागिता का वातावरण तैयार कर विश्वविद्यालय के लिए एक मजबूत विकास-रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसके लिए सभी विषयों और विभागों से सुझाव एवं इनपुट लिए जाएंगे। प्राप्त सुझावों के आधार पर एक नया आयोजन एवं कार्ययोजना तैयार कर उसका प्रभावी प्रेजेंटेशन किया जाएगा।
बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शैक्षणिक, प्रशासनिक और विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा की गई। कुलपति ने सभी शिक्षकों और विभागों से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता, विद्यार्थियों की उपलब्धियों और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई जा सकती है।
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