
पूर्वांचल विश्वविद्यालय में 9 अधूरे निर्माणों का आकलन, 4 भवन होंगे ध्वस्त

ऑडिटोरियम, बायोटेक्नोलॉजी भवन और इंडोर स्टेडियम भी शामिल; पांच भवनों का पुरानी लागत पर कराया जाएगा निर्माण
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में वर्षों से अधूरे पड़े नौ निर्माण कार्यों का आकलन किया गया है। जांच और तकनीकी मूल्यांकन के बाद इनमें से चार भवनों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया है। ध्वस्त किए जाने वाले भवनों में ऑडिटोरियम, बायोटेक्नोलॉजी भवन और इंडोर स्टेडियम समेत चार निर्माण शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय का ऑडिटोरियम निर्माण वर्ष 2000 में शुरू हुआ था, लेकिन करीब 10 प्रतिशत काम होने के बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। लंबे समय से अधूरा पड़े इस भवन की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के बाद इसे ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया है।
50 लाख से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की डीएम ने की समीक्षा, समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देशबायोटेक्नोलॉजी भवन की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। भवन की छत में दरारें और पानी का रिसाव पाया गया। इसके अलावा बीम में भी क्रैक मिलने की बात सामने आई है। तकनीकी स्थिति को देखते हुए इस भवन को भी गिराने का निर्देश दिया गया है।
इंडोर स्टेडियम का निर्माण भी करीब 10 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। लंबे समय से अधूरे पड़े इस निर्माण को भी ध्वस्त किए जाने वाले भवनों की सूची में शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार अन्य एक भवन को भी तकनीकी मूल्यांकन के बाद ध्वस्त किया जाएगा।
पांच भवनों का पूरा कराया जाएगा निर्माण
अधूरे नौ निर्माणों में से पांच भवनों को ध्वस्त करने के बजाय उनका निर्माण पूरा कराने का निर्णय लिया गया है। इनमें छात्र सुविधा केंद्र, टाइप-1 के 12 फ्लैट और रोवर्स रेंजर्स भवन समेत अन्य निर्माण शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पांच भवनों का निर्माण संबंधित कार्यदायी संस्था को पुरानी स्वीकृत लागत पर ही पूरा करना होगा। इसके लिए निर्माण कार्य को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिन भवनों को ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया है, उनके संबंध में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। तकनीकी जांच और भवनों की वर्तमान स्थिति के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। ध्वस्तीकरण के बाद संबंधित स्थानों के उपयोग और नए निर्माण को लेकर आगे की प्रक्रिया विश्वविद्यालय स्तर पर तय की जाएगी।






