
जबरन वसूली और लूट के दो मामलों में दो निलंबित आरक्षियों समेत पांच आरोपी गिरफ्तार

जौनपुर। जबरन वसूली और लूट के दो मामलों में जौनपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो निलंबित पुलिस आरक्षियों समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार अथवा न्यायालय में आत्मसमर्पण कराया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन थानाध्यक्ष सुरेरी उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह को निलंबित किया गया है। दोनों प्रकरणों की निष्पक्ष और गहन विवेचना के लिए पुलिस उपमहानिरीक्षक वाराणसी परिक्षेत्र ने पांच सदस्यीय विशेष अन्वेषण टीम (एसआईटी) गठित की है।
पहला मामला थाना जलालपुर का है। पुलिस के अनुसार 17 सितंबर को मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप है कि 15 सितंबर को संकीत सिंह पीड़ित को अपने साथ ले गया, जहां चार अज्ञात लोगों ने उसे वाहन में बैठाकर मारपीट की और जान से मारने की धमकी देकर रुपये मांगे। आरोपियों ने मोबाइल छीनकर यूपीआई के माध्यम से करीब 2.15 लाख रुपये विभिन्न खातों में स्थानांतरित कराए और एटीएम से भी धनराशि निकलवाई।
दूसरा मामला थाना सुरेरी का है। 22 सितंबर को दर्ज मुकदमे में राजेंद्र दूबे समेत सादे कपड़ों में मौजूद तीन-चार अज्ञात लोगों और खाताधारक वंशनरायन गिरी को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि 13 सितंबर को पीड़ित को बुलाकर सादे कपड़ों में मौजूद लोगों ने स्वयं को पुलिसकर्मी बताया और वाहन में बैठाकर करीब 1.65 लाख रुपये वसूल किए। यूपीआई के जरिए भी खाताधारक के खाते में रकम स्थानांतरित कराई गई।
एसआईटी ने 24 घंटे में घटना में शामिल पुलिसकर्मियों की पहचान कर ली। पुलिस ने 23 सितंबर को मनीष पटेल, निलंबित आरक्षी सत्येंद्र कुमार गौड़ और निलंबित आरक्षी विष्णु सिंह को गिरफ्तार किया। आरक्षियों के विरुद्ध जबरन वसूली, लूट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। वहीं पुलिस की दबिश के दबाव में संकीत और विकास ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस के अनुसार विवेचना में अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। एसआईटी साक्ष्य जुटाकर उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार अथवा पद के दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई होगी।








