पूर्वांचल विश्वविद्यालय में ‘छात्रवृत्ति योजना का सफल क्रियान्वयन’ विषयक कार्यशाला आयोजित
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर एवं जिला समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में ‘छात्रवृत्ति योजना का सफल क्रियान्वयन’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जनपद के माध्यमिक एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों, प्रबंधकों, छात्रवृत्ति नोडल अधिकारियों तथा विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान छात्रवृत्ति आवेदन, सत्यापन और वितरण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. ने कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। शासन की मंशा है कि जानकारी के अभाव अथवा आवेदन प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों के कारण कोई भी पात्र छात्र-छात्रा योजना के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की और कहा कि जिला प्रशासन विद्यार्थियों तथा संस्थानों को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि छात्रवृत्ति वितरण के मामले में जौनपुर पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को बनाए रखने के साथ ही प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों के आवेदन समय से कराए जाएं और सत्यापन की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही न हो, ताकि पात्र विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर छात्रवृत्ति का लाभ मिल सके।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने स्वागत संबोधन में कहा कि छात्रवृत्ति योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि शासन की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ पात्र विद्यार्थियों तक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचे। उन्होंने प्रत्येक शिक्षण संस्थान में ‘छात्रवृत्ति पटल’ स्थापित किए जाने का सुझाव दिया, ताकि विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति से संबंधित सभी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके।
जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। पात्र विद्यार्थियों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के साथ ही आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जानी चाहिए।
जिला समाज कल्याण अधिकारी नीरज पटेल ने विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, शासन द्वारा निर्धारित समय-सारिणी और महत्वपूर्ण तिथियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आवेदन करते समय विद्यार्थियों के दस्तावेजों और व्यक्तिगत विवरणों को सावधानीपूर्वक दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि बाद में सत्यापन के दौरान किसी प्रकार की समस्या न आए।
कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों, प्रबंधकों और कर्मचारियों ने छात्रवृत्ति से जुड़े कई व्यावहारिक प्रश्न उठाए। फार्मेसी संस्थान के डॉ. नृपेन्द्र सिंह ने सवाल किया कि बीफार्मा पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को उनके वास्तविक शुल्क से कम शुल्क प्रतिपूर्ति क्यों मिलती है। इस पर जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि शासन की ओर से प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम शुल्क प्रतिपूर्ति की सीमा निर्धारित की गई है। इसी सीमा के आधार पर विद्यार्थियों को प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जाता है, ताकि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना से लाभान्वित किया जा सके।
एक प्रतिभागी ने पूछा कि जिन विद्यार्थियों के माता-पिता नहीं हैं, वे आय प्रमाण पत्र किसका लगाएंगे। इस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि ऐसी स्थिति में विद्यार्थी अपने अभिभावक का आय प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकता है। इसी तरह कई प्रतिभागियों ने प्राप्तांक और पूर्णांक से संबंधित सवाल किए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थी द्वारा आवेदन में भरे गए प्राप्तांक एवं पूर्णांक और विश्वविद्यालय द्वारा भरे जाने वाले प्राप्तांक एवं पूर्णांक में समानता होनी चाहिए। दोनों में अंतर होने पर छात्रवृत्ति आवेदन में समस्या उत्पन्न हो सकती है।
कार्यशाला में छात्रवृत्ति आवेदन, सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, आय प्रमाण पत्र, बैंक खाते और छात्रवृत्ति पोर्टल से संबंधित विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने तथा विद्यार्थियों के दस्तावेजों और विवरणों को सही तरीके से पोर्टल पर दर्ज करने से छात्रवृत्ति वितरण में आने वाली अनावश्यक परेशानियों को कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। संचालन सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नितेश जायसवाल ने किया। इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी मीनाक्षी, उपकुलसचिव अजीत प्रताप सिंह सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, जनपद के माध्यमिक एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य और छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी मौजूद रहे।
प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान अधिकारियों और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों के बीच छात्रवृत्ति प्रक्रिया को लेकर विस्तृत संवाद हुआ। अधिकारियों ने संबंधित संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को आवेदन से पहले ही जरूरी दस्तावेजों और प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रवृत्ति योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का समाधान कर पात्र विद्यार्थियों को समय से योजना का लाभ उपलब्ध कराना रहा।








