मुंगराबादशाहपुर। सर्पदंश के बाद एक युवक की मौत के मामले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कथित लापरवाही और चिकित्सकीय जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मृतक पत्रकार सूरज विश्वकर्मा का भाई बताया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि यदि युवक को समय पर उचित उपचार मिल जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी गंगा राम ने संबंधित चिकित्सक ओम प्रकाश का तबादला कर दिया है। हालांकि, परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि होती है तो केवल तबादला पर्याप्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
परिजनों की ओर से मामले की निष्पक्ष चिकित्सकीय जांच कराने की मांग की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट करने की मांग है कि चिकित्सक ने मरीज को कब देखा, उसे क्या उपचार दिया गया, कौन सी दवाएं दी गईं और उसकी हालत के अनुसार आगे की चिकित्सा प्रक्रिया क्या अपनाई गई। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने की आवश्यकता थी या नहीं और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।
परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में उपचार में गंभीर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी पहलू की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
मामला अब केवल चिकित्सक के तबादले तक सीमित नहीं है। परिजन चाहते हैं कि घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों के उपचार को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।


