जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब शैक्षणिक वर्ष में दो बार पीएचडी में प्रवेश दिया जाएगा, जिससे शोधार्थियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी और शोध कार्य समय पर शुरू हो सकेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पीएचडी प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रहेगी। हालांकि, यूजीसी नेट, जेआरएफ और अन्य निर्धारित पात्रता श्रेणियों के अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से छूट प्रदान की जाएगी। वहीं केवल स्नातकोत्तर उपाधि के आधार पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत विभागीय शोध समिति (डीआरसी) की बैठकें भी वर्ष में दो बार आयोजित की जाएंगी। प्रवेश प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में नेट, जेआरएफ एवं अन्य पात्र अभ्यर्थियों की डीआरसी आयोजित कर प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में पीएचडी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों की डीआरसी संपन्न होगी।
डीआरसी के बाद आरडीसी, शुल्क जमा करने तथा शोध निर्देशक (गाइड) आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि इस पहल से शोध में नामांकन बढ़ेगा और विभिन्न विभागों में रिक्त शोध सीटों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शोध गतिविधियों को गति देना और पात्र अभ्यर्थियों को समयबद्ध अवसर उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष में दो बार पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया संचालित करने की तैयारी की जा रही है।


