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    रघुनाथपुर में विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच, ग्रामीणों के बयान दर्ज

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    जौनपुर। मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत रघुनाथपुर में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और फर्जी हस्ताक्षर के आरोपों की जांच शुक्रवार को शुरू हुई। जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच टीम गांव पहुंची, जहां सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में विभिन्न बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की गई। अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं और ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए।

    बताया जाता है कि रघुनाथपुर निवासी समाजसेवी प्रदीप पांडे ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी जौनपुर को शिकायत भेजकर ग्राम पंचायत में संचालित विभिन्न विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया था। शिकायत में ग्राम प्रधान पर सरकारी योजनाओं के धन के दुरुपयोग तथा भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि मनरेगा योजना के तहत फर्जी मास्टर रोल तैयार कर बिना कार्य कराए सरकारी धन का भुगतान कराया गया। इसके अलावा योजना में धांधली करते हुए अपने परिचितों और कथित लाभार्थियों के खातों में धनराशि भेजे जाने की भी शिकायत की गई है।

    आरोपों में यह भी कहा गया है कि तालाबों की खुदाई, सड़क निर्माण, विद्यालय, पंचायत भवन और अन्य विकास कार्यों में कागजों पर काम दिखाकर सरकारी धन निकाला गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि कई कार्यों में वास्तविक श्रमिकों की जगह मशीनों का इस्तेमाल किया गया, जबकि भुगतान मनरेगा मजदूरों के नाम से दर्शाया गया।

    इन्हीं आरोपों की जांच के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी नरेंद्र विश्वकर्मा अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने शिकायत में उल्लिखित विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया और संबंधित दस्तावेजों तथा कार्यों का भौतिक सत्यापन किया। साथ ही शिकायतकर्ताओं और ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए गए।

    जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तालाबों की खुदाई जेसीबी मशीनों से कराई गई, जबकि भुगतान मनरेगा मद से किया गया। इसके अलावा इंटरलॉकिंग, मेड़बंदी, पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केंद्र और विद्यालय की बाउंड्री वॉल निर्माण कार्यों में भी मानकों की अनदेखी किए जाने तथा अधूरे कार्यों के बावजूद भुगतान होने का आरोप लगाया गया।

    कुछ ग्रामीणों और लाभार्थियों ने भी जांच टीम के सामने आरोप लगाया कि आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर 20 से 30 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

    जांच अधिकारी नरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि ग्राम पंचायत में कराए गए कार्यों और उपलब्ध अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी जौनपुर को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    जांच के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रामपुर थाना पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति के बीच पूरे मामले की जांच की गई। अब ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की निगाहें प्रशासन की जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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