जौनपुर। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही ऑनलाइन एडमिशन के नाम पर साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी फर्जी वेबसाइटों, सोशल मीडिया विज्ञापनों और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से छात्रों एवं अभिभावकों को निशाना बना रहे हैं। इस संबंध में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के साइबर क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने एडवायजरी जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
डॉ. राठौर ने बताया कि साइबर ठग इंटरनेट, फेसबुक, टेलीग्राम, व्हाट्सएप समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक विज्ञापन और लुभावने ऑफर दिखाकर छात्रों को अपने जाल में फंसाते हैं। प्रोसेसिंग फीस, सीट कन्फर्मेशन या विदेश में एडमिशन दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बाद ये ठग फरार हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर विज्ञापन या वेबसाइट पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। कई ठग नामचीन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट तैयार कर छात्रों को भ्रमित करते हैं। इन वेबसाइटों पर प्रतिष्ठित संस्थानों की तस्वीरें और भ्रामक जानकारियां डालकर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश की जाती है।
डॉ. राठौर ने चेतावनी देते हुए कहा कि “सीमित सीटें”, “100 प्रतिशत प्लेसमेंट”, “घर बैठे एडमिशन” और “विदेश में पढ़ाई का सुनहरा अवसर” जैसे आकर्षक संदेशों के जरिए छात्रों पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाया जाता है। जल्दबाजी में फीस जमा करने वाले कई छात्र बाद में साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने अपील की कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और टेलीग्राम या व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए एडमिशन संबंधी संदेशों पर भरोसा कर पैसे ट्रांसफर न करें।
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता की जांच अवश्य करें। इसके लिए संबंधित विश्वविद्यालय, यूजीसी, एआईसीटीई, पीसीआई जैसी संस्थाओं की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी सत्यापित करें। साथ ही केवल ऑनलाइन जानकारी के आधार पर भुगतान न करें, बल्कि संस्थान का ऑफलाइन सत्यापन भी करें। यदि संभव हो तो स्वयं जाकर जानकारी लें और वहां अध्ययन कर रहे या पूर्व छात्रों से फीडबैक प्राप्त करें।
डॉ. राठौर ने बताया कि विदेश में पढ़ाई के नाम पर भी कई फर्जी एजेंसियां सक्रिय हैं, जो खुद को अधिकृत एजेंट या काउंसलर बताकर एडवांस फीस वसूल लेती हैं, लेकिन बाद में पूरा मामला फर्जी साबित होता है। इसके अलावा ऑनलाइन कोर्स के नाम पर भी बड़े स्तर पर धोखाधड़ी हो रही है। विज्ञान, फार्मेसी और फिजियोथैरेपी जैसे व्यावहारिक पाठ्यक्रमों को पूरी तरह ऑनलाइन बताकर एडमिशन कराया जा रहा है, जबकि इनकी पढ़ाई बिना लैब और प्रायोगिक प्रशिक्षण के संभव नहीं है।
उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से सतर्क रहने, हर जानकारी की पुष्टि करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की है।

