• Mon. Jul 6th, 2026

    विदेश में नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाला गिरफ्तार

    Share

    इंटरनेट से डाउनलोड किए गए वर्क परमिट में एडिटिंग कर तैयार करता था फर्जी दस्तावेज

    मालदीव भेजने के नाम पर करता था लाखों की ठगी

    आजमगढ़। विदेश में नौकरी दिलाने और आकर्षक वेतन का लालच देकर लोगों से साइबर ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को आजमगढ़ साइबर सेल और सिधारी थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी इंटरनेट से मालदीव के असली वर्क परमिट का प्रारूप डाउनलोड कर उसमें एडिटिंग कर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और व्हाट्सएप व प्रिंट कॉपी के जरिए लोगों को भेजकर उनसे किस्तों में रुपये वसूलता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो फर्जी मालदीव वर्क परमिट, एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, नकदी तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की है।

    प्रतिबिम्ब पोर्टल पर जांच के दौरान मिली सफलता

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘साइबर ठगी के जड़ में वार’ के तहत साइबर सेल और थाना सिधारी पुलिस की टीम प्रतिबिम्ब पोर्टल पर संदिग्ध बैंक खातों और एटीएम हॉटस्पॉट की जांच कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि एक व्यक्ति मालदीव में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा है और प्लेटिना मोटरसाइकिल से हुसैनगंज की ओर से छतवारा आ रहा है।

    सूचना मिलते ही पुलिस ने यादव ढाबा के पास घेराबंदी की। पुलिस को देखकर आरोपी भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन टीम ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया। पूछताछ में उसकी पहचान मुकेश यादव (29) पुत्र चंद्रभूषण यादव निवासी हैदराबाद (छतवारा), थाना सिधारी, जनपद आजमगढ़ के रूप में हुई।

    इंटरनेट से डाउनलोड करता था असली परमिट, फिर बनाता था फर्जी दस्तावेज

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने इंटरनेट से मालदीव के Ministry of Economic Development के मूल वर्क परमिट का प्रारूप डाउनलोड कर अपने मोबाइल में सुरक्षित रखा था। बाद में उसी फाइल में एडिटिंग कर अलग-अलग लोगों के नाम से फर्जी वर्क परमिट तैयार करता था। इसके बाद वह इन दस्तावेजों को व्हाट्सएप अथवा प्रिंट कॉपी के माध्यम से भेजकर लोगों को विश्वास में लेता और उनसे विदेश भेजने के नाम पर पैसे वसूलता था।

    मोबाइल की जांच में पुलिस को मालदीव वर्क परमिट का मूल टेम्पलेट भी मिला, जिसका उपयोग आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार करने में करता था।

    मुंबई में बने संपर्कों का उठाया फायदा

    जांच में सामने आया कि आरोपी पहले मुंबई में मर्चेंट नेवी से जुड़े कार्य में काम कर चुका है। इस दौरान उसकी पहचान देश के विभिन्न राज्यों के ऐसे श्रमिकों और मजदूरों से हुई थी, जो विदेश जाकर रोजगार करना चाहते थे। आरोपी ने इन्हीं पुराने संपर्कों का फायदा उठाया और खुद को विदेश में नौकरी तथा वीजा उपलब्ध कराने वाला एजेंट बताकर लोगों का विश्वास जीत लिया।

    इसके बाद वह मालदीव सहित अन्य देशों में अच्छी सैलरी वाली नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे विभिन्न किस्तों में रकम वसूलता था। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कई लोगों से इस तरह ठगी करने की बात स्वीकार की है। पुलिस अब उसके अन्य पीड़ितों और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

    भाभी के दस्तावेजों से खुलवाया बैंक खाता

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपनी भाभी के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यूनियन बैंक में बैंक खाता खुलवाया था। समन्वय पोर्टल पर जांच के दौरान इस खाते के खिलाफ पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति की साइबर ठगी की शिकायत मिली।

    शिकायत के अनुसार आरोपी ने विदेश भेजने के लिए कुल 35 हजार रुपये तय किए थे, जिसमें से पीड़ित से 21 हजार रुपये ऑनलाइन प्राप्त कर लिए और बदले में उसे फर्जी मालदीव वर्क परमिट भेज दिया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सफलता मिली।

    यह सामान हुआ बरामद

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो फर्जी मालदीव वर्क परमिट, एक सैमसंग मोबाइल फोन, एक आधार कार्ड, 200 रुपये नकद तथा घटना में प्रयुक्त प्लेटिना मोटरसाइकिल बरामद की। मोटरसाइकिल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज कर दिया गया है।

    इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही उसके बैंक खातों, सहयोगियों, लेन-देन और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है।

    पुलिस की अपील

    आजमगढ़ पुलिस ने लोगों से अपील की है कि विदेश में नौकरी, वीजा या वर्क परमिट दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति या एजेंसी पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी एजेंट को धनराशि देने से पहले उसकी वैधता और प्रामाणिकता की पूरी जांच करें। यदि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *