वाराणसी। शहर के सिनेमा इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। अस्सी और नब्बे के दशक में फिल्म प्रेमियों की पहली पसंद रहे ऐतिहासिक टक्साल सिनेमा हॉल को ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कभी यहां नई फिल्मों के पहले शो के लिए टिकट खिड़कियों पर लंबी कतारें लगती थीं और बालकनी टिकट मिलना एक बड़ी उपलब्धि माना जाता था।
साल 1983 में मिंट हाउस क्षेत्र में निर्मित यह सिनेमा हॉल अपने समय का अत्याधुनिक थिएटर माना जाता था। लगभग 1272 दर्शक क्षमता, विशाल स्क्रीन, फोर ट्रैक डॉल्बी स्टीरियो साउंड सिस्टम, आरामदायक सीटिंग और पार्किंग जैसी सुविधाओं ने इसे पूर्वांचल के प्रमुख सिनेमाघरों में शामिल कर दिया था। यहां ‘कुली’, ‘शराबी’, ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘मैंने प्यार किया’ और ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसी सुपरहिट फिल्मों ने दर्शकों के दिलों पर राज किया।
समय के साथ मल्टीप्लेक्स संस्कृति और डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव ने सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की चमक को फीका कर दिया। करीब दो दशक पहले बंद हो चुका टक्साल सिनेमा हॉल अब पूरी तरह ढहाए जाने की प्रक्रिया में है।
हालांकि, टक्साल सिर्फ एक सिनेमा हॉल नहीं था, बल्कि बनारस की सांस्कृतिक धरोहर और लाखों फिल्म प्रेमियों की यादों से जुड़ा एक ऐसा नाम था, जो आने वाले समय में भी लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।

