बख्शा, जौनपुर। सावन मास के पावन अवसर पर उमरछा स्थित मृत्युञ्जय महादेव धाम में आयोजित नव दिवसीय श्रीराम कथा के छठवें एवं सातवें दिन श्रद्धालु भक्ति और भावनाओं से सराबोर दिखाई दिए। कथा व्यास परम पूज्य रघुश्रेय श्री महाराज ने श्रीराम वनगमन, राम-केवट संवाद, दशरथ मरण तथा भरत मनावन जैसे मार्मिक प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण एवं सजीव वर्णन किया। कथा के दौरान कई अवसरों पर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
कथा व्यास ने भगवान श्रीराम के वनगमन प्रसंग के माध्यम से त्याग, मर्यादा और कर्तव्य की भावना को रेखांकित किया। वहीं लक्ष्मण जी के श्रीराम के प्रति अनन्य समर्पण का वर्णन करते हुए जब महाराज श्री ने भजन “तुम्हीं मेरी नैया, किनारा तुम्हीं हो, मेरी जिंदगी का सहारा तुम्हीं हो” प्रस्तुत किया तो पूरा कथा पंडाल भक्तिभाव से गूंज उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
श्रीराम और केवट के संवाद का प्रसंग कथा का विशेष आकर्षण रहा। कथा व्यास ने केवट की निष्कपट भक्ति, प्रभु श्रीराम के चरणों के प्रति उसके प्रेम और समर्पण को स्थानीय भाषा के भावपूर्ण गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया। “हम नाहीं नियरा ले आईब आपन नैया हो कि डर लागेला, तोहरे गोड़वा के धुरिया से डर लागेगा” ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
गोस्वामी तुलसीदास जी की कवितावली में वर्णित केवट की विनम्रता और समर्पण का प्रसंग सुनाते हुए महाराज रघुश्रेय श्री ने बताया कि केवट के लिए प्रभु श्रीराम केवल यात्री नहीं, बल्कि उसके आराध्य और जीवन का आधार थे। प्रभु के चरण धोने के बाद ही उन्हें नाव पर बैठाने की केवट की भावना उसकी अनन्य भक्ति का प्रतीक है।
इसके बाद “मुझे तूने मालिक बहुत दे दिया है, तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया है” भजन पर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे।
कथा के क्रम में महाराज श्री ने राजा दशरथ के श्रीराम वियोग में प्राण त्यागने तथा भरत जी द्वारा भगवान श्रीराम को अयोध्या वापस लाने के लिए किए गए प्रयासों का मार्मिक वर्णन किया। भरत जी के त्याग, भ्रातृप्रेम और श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और कथा के मुख्य यजमान सुशील कुमार उपाध्याय ने कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि त्याग, मर्यादा, प्रेम, कर्तव्य और पारिवारिक मूल्यों का जीवन-दर्शन है। इसके प्रत्येक प्रसंग में मानव जीवन के लिए कोई न कोई महत्वपूर्ण संदेश निहित है।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व आचार्य पंडित अभिषेक मिश्र एवं पंडित हीरामणि उपाध्याय द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्य यजमान सुशील कुमार उपाध्याय एवं उनकी पत्नी पदमा उपाध्याय, यजमान विकास शुक्ल एवं उनकी पत्नी मधु, तथा श्याम सुंदर एवं उनकी पत्नी ने भगवान श्रीराम के चित्र एवं कथा व्यास परम पूज्य रघुश्रेय श्री महाराज का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कराया गया।
श्रीराम कथा के इस धार्मिक आयोजन में रमाशंकर उपाध्याय, सागर शुक्ल, त्रिलोकी नाथ, केशव प्रसाद, सुरेश चंद्र, अशोक दुबे, कैलाश नाथ शुक्ल, सतीश उपाध्याय, सदानंद, लालजी शुक्ल, ज्वाला प्रसाद, शिव मुनि उपाध्याय, शेषनाथ शुक्ल, कृष्ण शुक्ल, अरविंद, अनिल गुप्त, विकास शुक्ल, विनोद शुक्ल, लालप्रताप, अरविंद सिंह, जयशंकर पाल, लालमुनि एवं पद्माकर शुक्ल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

