
पागल सियार ने शेरपुर और कपसिया में मचाया कोहराम

36 से ज्यादा लोग और एक दर्जन मवेशी लहूलुहान
अस्पताल से नदारत एंटी रेबीज
खुटहन।शनिवार की ढलती शाम शेरपुर और कपसिया गांव के लिए किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं थी। शाम के करीब साढ़े सात बजे अचानक गांव में घुसे एक पागल सियार ने ऐसा उत्पात मचाया कि पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। रास्ते में जो भी सामने आया—महिला, पुरुष, बच्चे या मवेशी—सियार ने किसी को नहीं बख्शा और नोच-नोच कर लहूलुहान कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सियार सबसे पहले शेरपुर गांव में दाखिल हुआ। खेतों और गलियों में जो दिखा, वह उसी पर झपट पड़ा। शेरपुर में कोहराम मचाने के बाद वह पड़ोस के गांव कपसिया जा पहुंचा। रात 10 बजे तक चले इस ढाई घंटे के तांडव में करीब 36 (तीन दर्जन) ग्रामीण और एक दर्जन पालतू जानवर गंभीर रूप से घायल हो गए। आखिरकार, अपनी जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों ने लाठी-डंडों के साथ सियार की घेराबंदी की और उसे मौके पर ही मार गिराया।
सियार के आतंक से तो ग्रामीणों ने निजात पा ली, लेकिन असली त्रासदी इसके बाद शुरू हुई। अस्पताल पहुंचे घायलों को इलाज के नाम पर सिर्फ मायूसी हाथ लगी:
पशुपालकों ने आरोप लगाया कि सरकारी पशु अस्पताल में रेबीज का टीका नहीं मिलने पर उन्हें महंगे दामों में दुकानों से इंजेक्शन खरीदकर जानवरों को लगवाने पड़े। इस पर पशुधन अधिकारी संतोष गुप्ता का कहना है कि उनके विभाग में एंटी-रेबीज इंजेक्शन की सप्लाई ही नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर पिछले कई महीनों से एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते घायलों को निजी क्लीनिकों की ओर दौड़ लगानी पड़ी।
इस बदहाली और लापरवाही पर जब सीएचसी के चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक गंवारा नहीं समझा।
सियार के हमले से घायल ग्रामीण अब न सिर्फ जख्मों के दर्द से, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की इस घोर अनदेखी और रेबीज के खतरे से सहमे हुए हैं।






