नेपाल में प्रकृति का जो रौद्र रूप देखने को मिला, उसने हृदय को झकझोर कर रख दिया है… इस विनाश लीला को भूला पाना आसान नहीं होगा… पहाड़ दरक गए, बस्तियां मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं और चंद मिनटों में हजारों जिंदगियां तबाह हो गईं… कुदरत के आगे इंसान कितना बेबस और लाचार है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण इन घटनाओं में दिखा…
इस विनाशकारी फ्लैश फ्लड का मुख्य कारण हिमालयी क्षेत्र में विशाल ग्लेशियर और चट्टानों का टूटना तथा भूस्खलन से नदी का मार्ग अवरुद्ध होना था… तिब्बत-नेपाल सीमा के पास ऊंचे पहाड़ों से बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में गिरा जिसके मलवे ने भोटे कोशी / त्रिशूली नदी प्रणाली की सहायक नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे एक अस्थायी और कमजोर प्राकृतिक बांध बन गया… कुछ समय बाद पानी के भारी दबाव के कारण यह बांध टूट गया और सैलाब आ गया… इस दौरान तिब्बती क्षेत्र में दर्ज किए गए हल्के भूकंप के झटकों ने इस हिमस्खलन और भूस्खलन को और बढ़ावा दिया…
अचानक आई यह भीषण बाढ़ कोई सामान्य प्राकृतिक घटना नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का प्रतिफल है जिसके परिणामस्वरूप हिमालय के ग्लेशियर पिघल रहे हैं, पहाड़ों की चट्टानें कमजोर हो रही हैं और ऐसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है…
केदारघाटी, वायनाड और जोशीमठ के बाद नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर बता दिया कि विकास के नाम पर इंसान कितना भी बड़ा और शक्तिशाली होने का भ्रम पाल ले, प्रकृति के सामने उसकी औकात एक कतरे से अधिक नहीं… जिन पहाड़ों को काटकर टनेल, बांध और इमारतें खड़ी की जाती हैं वही पहाड़ जब करवट लेते हैं तो पलभर में बस्तियाँ, सपने और जीवन मलबे में तब्दील हो जाते हैं… विज्ञान चाँद तक पहुँच सकता है लेकिन प्रकृति के एक झटके को रोक नहीं सकता… पैसा जीवन को वापस नहीं ला सकता और सत्ता मृत्यु को टाल नहीं सकती…
आज आवश्यकता अहंकार की नहीं, विनम्रता और संवेदना की है… प्रकृति को जीतने का भ्रम त्यागकर उसके साथ जीना सीखना होगा तभी इस पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रह सकेगा…
नमन है देवदूत बने नेपाली सेना के जवानों और रेस्क्यू कर्मियों को, जो अपनी जान जोखिम में डालकर मौत के मुंह से जिंदगियों को निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं…
इस हादसे का शिकार बने तमाम लोगों के लिये हमारे हृदय में केवल प्रार्थना है, नि:शब्द प्रार्थना… ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और उनके परिवारों को इस पीड़ा को सहन कर पाने की शक्ति प्रदान करें…
हम सभी नेपाल के इस दर्द को साझा करते हुए इस कठिन समय में जिस प्रकार भी बन सके, सहयोग के लिए हाथ बढ़ाएं…
डॉ. स्वयंभू शलभ


