जौनपुर। शिक्षकों की प्रमुख मांगों और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में सोमवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर माध्यमिक शिक्षक संघ ठाकुराई गुट के नेतृत्व में ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन किया गया। विभिन्न विद्यालयों से करीब 400 शिक्षकों ने धरने में शामिल होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। इस दौरान शिक्षकों ने कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लंबित प्रकरणों के तत्काल निस्तारण की मांग की।
मानदेय शिक्षकों को पूर्णकालिक दर्जा देने की मांग
धरने के दौरान गोरखपुर के प्रांतीय सम्मेलन में पारित शिक्षकों की प्रमुख मांगों से उपस्थित शिक्षकों को अवगत कराया गया। वक्ताओं ने वर्ष 2000 के बाद नियुक्त मानदेय शिक्षकों को पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा देने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि मानदेय शिक्षक लंबे समय से पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ शिक्षण कार्य कर रहे हैं, इसलिए उनके सेवा संबंधी मामलों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए।
प्रोन्नति और वेतनमान की पत्रावलियां लंबित
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्रोन्नति और वेतनमान से संबंधित पत्रावलियां कई महीनों से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में लंबित हैं। 18 जुलाई को बैठक होने के बावजूद अभी तक किसी शिक्षक का प्रोन्नति आदेश जारी नहीं किया गया है। संगठन ने लंबित पत्रावलियों का तत्काल निस्तारण करने की मांग की।
एनपीएस से ओपीएस में जाने वाले शिक्षकों का मामला उठा
धरने में एनपीएस से पुरानी पेंशन योजना में जाने वाले शिक्षकों की एनपीएस धनराशि को जीपीएफ खाते में स्थानांतरित नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। शिक्षकों ने कहा कि संबंधित धनराशि अभी तक कई शिक्षकों के जीपीएफ खातों में स्थानांतरित नहीं हुई है। इसे लेकर शिक्षकों में नाराजगी है।
विनियमितीकरण और मानदेय भुगतान की मांग
कई विद्यालयों के विनियमितीकरण से संबंधित पत्रावलियां अभी तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में नहीं पहुंचने की बात भी धरने में कही गई। वहीं, वर्ष 2000 के बाद नियुक्त मानदेय शिक्षकों के 20 मई से 30 मई तक के भुगतान को बिना किसी आदेश के रोके जाने का आरोप लगाया गया। रेहारी पतरही इंटर कॉलेज के एक शिक्षक के पदोन्नति प्रकरण को भी कई महीनों से लंबित रखने का मुद्दा उठाया गया।
सुविधा शुल्क लेने के आरोप लगाए
वक्ताओं ने कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों की समस्याओं और पत्रावलियों के निस्तारण में अनावश्यक देरी की जा रही है। आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में सुविधा शुल्क मिलने के बाद ही पत्रावलियों का तेजी से निस्तारण किया जाता है। हालांकि, ये आरोप संगठन के पदाधिकारियों की ओर से लगाए गए हैं।
लेखाधिकारी और डीआईओएस को चेतावनी
वक्ताओं ने लेखाधिकारी की कार्यप्रणाली पर आक्रोश जताते हुए शिक्षकों का उत्पीड़न बंद करने की चेतावनी दी। जिला विद्यालय निरीक्षक से सभी लंबित समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने की मांग की गई। संगठन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तालाबंदी जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
डॉ. राकेश सिंह ने भी साधा निशाना
प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राकेश सिंह ने आरोप लगाया कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जिन पत्रावलियों पर सुविधा शुल्क मिल जाता है, उनका निस्तारण तत्काल कर दिया जाता है, जबकि अन्य फाइलों को लंबित रखा जाता है। उन्होंने कहा कि संगठन इस तरह की कार्यप्रणाली को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और शिक्षकों के हित में आंदोलन जारी रहेगा।
400 शिक्षकों ने लिया हिस्सा
धरने को मंडल अध्यक्ष सरोज कुमार सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष अतुल कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष हसन सईद, उपाध्यक्ष दयाशंकर यादव, ओमप्रकाश सिंह, मीडिया प्रभारी राजेश सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया। धरने का संचालन जिला मंत्री ठाकुर प्रसाद तिवारी ने किया, जबकि अध्यक्षता जिलाध्यक्ष तेरस यादव ने की। विभिन्न विद्यालयों से करीब 400 शिक्षकों ने धरने में प्रतिभाग किया और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।



