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    ऑपरेशन ‘CyVazra’ के तहत आजमगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, साइबर ठगी गिरोह का सदस्य गिरफ्तार, बायोमेट्रिक मशीन समेत कई उपकरण बरामद

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    आजमगढ़। उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष अभियान ‘ऑपरेशन CyVazra’ के तहत आजमगढ़ पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी की धनराशि निकालने वाले गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। थाना गंभीरपुर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने आरोपी के कब्जे से बायोमेट्रिक मशीन, मोबाइल पीओएस मशीन, कूटरचित अंगूठा (बायोमेट्रिक क्लोन), एटीएम कार्ड, दो मोबाइल फोन, 1,750 रुपये नकद तथा एक टीवीएस एक्सएल-100 वाहन बरामद किया है। इस कार्रवाई के साथ ही ऑपरेशन के तहत अब तक कुल 12 शातिर साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी और 14 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।

    पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) चिराग जैन, अपर पुलिस अधीक्षक (यातायात) पंकज श्रीवास्तव तथा क्षेत्राधिकारी सदर आस्था जायसवाल के पर्यवेक्षण में थाना गंभीरपुर पुलिस और साइबर सेल लगातार साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

    पुलिस के अनुसार 11 जुलाई को साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक रवि प्रकाश गौतम एवं थाना गंभीरपुर पुलिस प्रतिबिंब पोर्टल पर मिले संदिग्ध बैंक खातों और एटीएम हॉटस्पॉट की जांच कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर दयालपुर निवासी 19 वर्षीय यश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया गया।

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने साथी सद्दाम के साथ मिलकर आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS) और ग्राहक सेवा केंद्र (CSC) का दुरुपयोग करता था। साइबर ठगी से प्राप्त रकम विभिन्न बैंक खातों में मंगाकर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और मोबाइल पीओएस मशीन के जरिए नकद निकाली जाती थी। इसके बाद कमीशन काटकर शेष धनराशि साइबर ठगों तक पहुंचा दी जाती थी। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसके बैंक खाते में पहले भी साइबर ठगी के 50 हजार रुपये आए थे, जिन्हें इसी तरीके से निकालकर बांट लिया गया था।

    पुलिस ने बरामद डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को कब्जे में लेकर तकनीकी जांच शुरू कर दी है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी गई है।

    एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि ऑपरेशन ‘CyVazra’ के तहत साइबर अपराधियों के साथ-साथ उनके आर्थिक नेटवर्क, म्यूल अकाउंट संचालकों और साइबर ठगी की रकम को वैध रूप देने वाले सहयोगियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि साइबर ठगी की किसी भी घटना की सूचना तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देकर पुलिस का सहयोग करें।

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