जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज एक शिकायत में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता, मेरिट निर्धारण और आरक्षण नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर प्रवेश प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की है।
बदलापुर तहसील के राजबाजार भोगीपुर निवासी अभ्यर्थी अजय कुमार मौर्य ने पीयूसीआरईटी-2024 के तहत हुए पीएचडी प्रवेश में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और कुछ ओबीसी अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में समायोजित कर प्रवेश दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिक अंक प्राप्त करने वाले कई अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं मिला, जबकि उनसे कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया।
शिकायत में प्रवेश परीक्षा के मूल्यांकन पर भी सवाल उठाए गए हैं। अजय मौर्य के अनुसार उपलब्ध स्कोर कार्ड में अधिकांश अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में 70 अंक दिए गए हैं, जिससे मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग ने न तो मेरिट सूची और न ही वेटिंग सूची सार्वजनिक की, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि पीयूसीआरईटी-2024 के अंतर्गत प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय अध्यादेश-2022 के अनुरूप पूरी की गई है। उप कुलसचिव द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए जवाब में शिकायत के निस्तारण का अनुरोध भी किया गया है।
फिलहाल शिकायतकर्ता स्वतंत्र जांच, डीआरसी और आरडीसी प्रक्रिया निरस्त करने तथा पूरी चयन प्रक्रिया दोबारा पारदर्शी तरीके से कराने की मांग पर कायम हैं। मामला विश्वविद्यालय परिसर से लेकर प्रशासनिक हलकों तक चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की निगाहें संभावित जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं।

