चंदवक, जौनपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग-233 के निर्माण से प्रभावित बलुआ गांव के किसानों के भूमि मुआवजा प्रकरण का समाधान पांच बार पैमाइश होने के बाद भी नहीं निकल सका है। लगातार हो रही नापी के बावजूद विवाद और उलझता जा रहा है, जिससे प्रभावित किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार केराकत तहसील क्षेत्र के बलुआ गांव के कुल 117 किसान राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण परियोजना से प्रभावित हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी भूमि अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन अधिकांश किसानों को मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि 117 में से केवल 7 किसानों को मुआवजा स्वीकृत किया गया है, जबकि लगभग 110 किसान अब भी मुआवजे से वंचित हैं।
किसानों का कहना है कि वर्ष 2017 से उन्हें भूमि अधिग्रहण संबंधी नोटिस मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, भूमि अधिग्रहण से जुड़े न्यायालयी मामलों में भी उन्हें पक्षकार बनाया गया था। इसके बावजूद अब संबंधित विभाग यह कहते हुए मुआवजा देने से इंकार कर रहा है कि सड़क के बाद की भूमि ग्राम समाज की है।
वहीं किसानों का दावा है कि चकबंदी अभिलेखों में जो ग्राम समाज की भूमि सड़क से सटी दिखाई जा रही है, वह दशकों पहले हुए सड़क चौड़ीकरण के दौरान सड़क में समाहित हो चुकी है। ऐसे में उनकी निजी भूमि को ग्राम समाज की भूमि बताकर मुआवजा रोका जा रहा है।
मामले को लेकर किसानों ने जिलाधिकारी से भी शिकायत की थी, जिसके बाद उपजिलाधिकारी ने पैमाइश कराने के निर्देश दिए। नायब तहसीलदार और कानूनगो के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम अब तक पांच बार पैमाइश कर चुकी है, लेकिन कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका है।
किसानों ने आरोप लगाया कि पूर्व में हुई राजस्व संबंधी त्रुटियों को सुधारने के बजाय उन्हें छिपाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। रविवार को राजस्व निरीक्षक दर्शन सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने पुनः सोमवार को पैमाइश करने का आश्वासन दिया है।
अब प्रभावित किसान प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर शीघ्र समाधान और उचित मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे हैं, ताकि वर्षों से लंबित यह विवाद समाप्त हो सके।


