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    महारास और रुक्मिणी विवाह प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु

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    खुटहन (जौनपुर)। क्षेत्र के त्रिकौलिया गांव में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना के साथ आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को महारास और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

    कथा के शुभारंभ से पूर्व मुख्य यजमान विजय बहादुर ‘पुजारी’ ने विधि-विधान से अर्चन-पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कथा व्यास पंडित अखिलेश चन्द्र मिश्र ने महारास प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि महारास स्त्री-पुरुष का मिलन नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा के चरणों में पूर्ण प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गोपियों का अनन्य प्रेम इतना महान था कि उसके आगे ज्ञान और वैराग्य के प्रतीक उद्धव भी नतमस्तक हो गए थे।

    रुक्मिणी विवाह प्रसंग की व्याख्या करते हुए कथा व्यास ने कहा कि माता रुक्मिणी साक्षात महालक्ष्मी का स्वरूप हैं और उनके पति केवल भगवान नारायण हैं। इसलिए लक्ष्मी के प्रति सदैव मातृभाव रखना ही मानव जीवन के लिए कल्याणकारी और मंगलकारी है।

    इस दौरान शिवम उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत भक्ति एवं धार्मिक गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उनके मधुर गायन पर श्रोता देर तक भक्ति भाव में डूबे रहे।

    कार्यक्रम में डॉ. हौसिला प्रसाद द्विवेदी, पं. सत्य प्रकाश मिश्रा, चंद्रपाल यादव, बेचन पांडेय, ओमप्रकाश दूबे, जीत बहादुर यादव, बिपिन सिंह, आनंद यादव, राहुल यादव, अतुल तिवारी, संतोष शर्मा, आशीष यादव, विकास यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष के साथ धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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