बरसठी | कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती। इन पंक्तियों को बघनरी गांव निवासी सुदामा सिंह ने अपनी मेहनत और धैर्य से चरितार्थ किया है। करीब सात वर्षों की कड़ी मेहनत और 50 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयास के बाद आखिरकार उनका चयन ग्राम पंचायत अधिकारी (वीपीओ) के पद पर हुआ है। सुदामा ने वर्ष 2014 से 2017 तक विप्रो में करीब साढ़े तीन वर्ष नौकरी की। इसके बाद वर्ष 2018 से प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। इस दौरान उन्होंने करीब 50 से 60 परीक्षाओं में हिस्सा लिया। कई परीक्षाओं में प्रारंभिक चरण में सफलता नहीं मिली, तो कई बार टाइपिंग और दस्तावेज सत्यापन के स्तर पर चयन से बाहर हो गए। लगातार मिली असफलताओं के बावजूद उन्होंने प्रयास नहीं छोड़ा।आखिरकार पेट-2022 के माध्यम से उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती परीक्षा में उनका चयन हुआ। विज्ञापन संख्या 01-परीक्षा/2022 के तहत हुई भर्ती में कुल 1468 पद थे। सुदामा ने हाईस्कूल में 67, इंटरमीडिएट में 69 और कंप्यूटर साइंस डिप्लोमा में 70 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय से बीए में 54 और एमए में 72 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। सुदामा के पिता प्रदीप कुमार सिंह पीडब्ल्यूडी में बाबू हैं, जबकि मां रेखा सिंह गृहिणी हैं। उनके दादा स्वर्गीय बंकेश बहादुर सिंह पीडब्ल्यूडी में जूनियर इंजीनियर रहे हैं। सुदामा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार, गुरुजनों और शुभचिंतकों को दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए सुदामा ने कहा, “रोमन साम्राज्य एक दिन में नहीं बना था। बड़ी सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास होता है।” उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने इसे अपनी मंजिल की राह में बाधा मानकर प्रयास जारी रखा। धैर्य, निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति विश्वास बनाए रखा जाए तो सफलता देर से ही सही, मिलती जरूर है। उनके चयन पर परिवार, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए बधाई दी।


