प्रो. कुमार बीरेन्द्र ने ‘बंगाल की प्रारम्भिक पत्रकारिता’ पर दिया विशेष व्याख्यान
प्रयागराज। हिन्दी विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज (संघटक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज) के संयुक्त तत्वावधान में 9 से 22 सितंबर 2026 तक आयोजित हिन्दी पखवाड़े का बुधवार को शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. कुमार बीरेन्द्र ने ‘बंगाल की प्रारम्भिक पत्रकारिता’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।
प्रो. कुमार बीरेन्द्र ने कहा कि बंगाल की पत्रकारिता को हिन्दी की दृष्टि से देखने के उद्देश्य से इस विषय का चयन किया गया है। उन्होंने बंगाल की पत्रकारिता में गद्य के साथ पद्यात्मक प्रवाह, लोक संस्कृति और तत्कालीन ब्रिटिश शासन के प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण पत्रिका ‘उदन्त मार्तण्ड’ के इतिहास पर चर्चा करते हुए बताया कि इसका प्रकाशन 30 मई 1826 को कलकत्ता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में प्रारम्भ हुआ था।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक पत्रकारिता कभी साहित्यिक पत्रकारिता से अलग नहीं रही। साहित्यिक पत्रकारिता ने सामाजिक और क्रांतिकारी चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निराला की उक्ति— “जनता साहित्य के पास आती नहीं, लाई जाती है”—का उल्लेख करते हुए उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट किया।
प्रो. कुमार बीरेन्द्र ने ‘बंगाल की पत्रकारिता ने नई राहें दिखाई’ विषय को विभिन्न आयामों में रखते हुए हिन्दी के विकास में पत्रकारिता के योगदान, देशकल्याण की भावना और संपादकीय पत्रकारिता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘उदन्त मार्तण्ड’, ‘सरस्वती’, ‘विशाल भारत’, ‘दिनमान’, ‘मतवाला’, ‘हंस’ और ‘चाँद’ जैसी महत्वपूर्ण पत्रिकाओं के माध्यम से हिन्दी पत्रकारिता की विकास-यात्रा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता पर लगातार प्रतिबंधों की छाया रही, फिर भी उसने अपनी क्रांतिकारी चेतना और युग-जागरण का आह्वान नहीं छोड़ा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के कुलानुशासक प्रो. मान सिंह ने की। उन्होंने कहा कि बंगाल की साहित्यिक भूमि अत्यंत समृद्ध और बौद्धिक रही है। बंगाल की पत्रकारिता ने न केवल बंगाल, बल्कि पूरे देश को वैचारिक रूप से प्रभावित किया। ‘उदन्त मार्तण्ड’ और ‘विशाल भारत’ जैसी पत्रिकाओं ने साहित्य का मान बढ़ाने के साथ लेखन-पठन की व्यापक संस्कृति विकसित की।
हिन्दी विभाग के संयोजक प्रो. आनन्द सिंह ने आभार व्यक्त किया। स्वागत एवं संचालन डॉ. अमरजीत राम ने किया। कार्यक्रम में हिन्दी विभाग एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

