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    सियासी दबंगई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, डॉक्टरों पर हमला करने वालों को हिरासत में लेने का निर्देश

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    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट और राजनीतिक दबाव के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों को तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी पालघर के रिलीफ अस्पताल में दही हांडी कार्यक्रम के दौरान घायल गोविंदाओं के इलाज और डिस्चार्ज को लेकर हुए विवाद के बाद सामने आई है।

    जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात मानव पिरामिड बनाते समय पांच गोविंदा घायल हो गए थे। उन्हें पालघर के रिलीफ अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें एक मरीज के सिर और रीढ़ में चोट की आशंका के चलते डॉक्टरों ने सीटी स्कैन और आगे के उपचार की सलाह दी। इसी दौरान इलाज, जांच और अस्पताल से छुट्टी को लेकर विवाद शुरू हो गया।

    अस्पताल की शिकायत के अनुसार, पांच मरीजों के इलाज और जांच का कुल बिल करीब 19,866 रुपये हुआ था, जिसमें 10 हजार रुपये जमा किए गए थे। बाकी भुगतान और मरीजों को डिस्चार्ज कराने को लेकर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि रविवार तड़के 15 से 20 लोग अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से बहस करने लगे। महिला डॉक्टर के साथ कथित गाली-गलौज और धमकी देने तथा एक कर्मचारी को थप्पड़ मारने का भी आरोप लगाया गया है।

    अस्पताल प्रशासन का आरोप है कि कुछ लोग आईसीयू तक पहुंच गए और वहां भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज करने का दबाव बनाया। घटना का कुछ हिस्सा सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होने की बात कही गई है।

    पालघर पुलिस ने अस्पताल की शिकायत पर 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें शिवसेना के पालघर जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे, शहर प्रमुख राहुल रामदास घराट और स्थानीय विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने मारपीट, धमकी, जबरन प्रवेश और अस्पताल में हिंसा से संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

    हालांकि, शिवसेना नेता कुंदन सांखे ने अस्पताल प्रशासन के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि वह घायल गोविंदाओं के इलाज और उन्हें डिस्चार्ज कराने के संबंध में बातचीत करने अस्पताल पहुंचे थे। मामले में पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

    सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक हस्तक्षेप पर बहस फिर तेज हो गई है। अदालत के रुख से साफ संकेत मिला है कि चिकित्सकों के साथ हिंसा या दबाव बनाने के मामलों में राजनीतिक रसूख को किसी भी स्थिति में ढाल नहीं बनने दिया जाएगा।

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