गुरुजनों के सम्मान में झुके राज्यमंत्री
करीब 300 सेवानिवृत्त शिक्षकों को स्मृतिचिह्न व अंगवस्त्रम भेंट कर लिया आशीर्वाद
जौनपुर। शहर के होटल रिवर व्यू में शनिवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन एवं शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरु श्रेष्ठ सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) खेल एवं युवा कल्याण गिरीश चंद्र यादव ने करीब 300 सेवानिवृत्त गुरुजनों को सम्मानित किया। राज्यमंत्री ने प्रत्येक सम्मानित शिक्षक के पास जाकर व्यक्तिगत रूप से स्मृतिचिह्न एवं अंगवस्त्रम भेंट किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। शिक्षक सम्मान के इस भावपूर्ण दृश्य ने समारोह में उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि शिक्षा कभी समाप्त नहीं होती। गुरु का महत्व जीवन के प्रत्येक चरण में बना रहता है। गुरु ही वह व्यक्ति है, जो अपने शिष्य को ज्ञान देने के साथ उसके व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा प्रदान करता है। गुरुजनों से प्राप्त शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति समाज और देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देने के योग्य बनता है।
उन्होंने कहा कि वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उनके प्राथमिक, इंटरमीडिएट, बीएससी और लॉ कॉलेज में शिक्षा देने वाले शिक्षक आज उनके सामने मौजूद हैं। ऐसे गुरुजनों का सम्मान करने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने उन्हें शिक्षा और संस्कार दिए, उनके प्रति जीवनभर सम्मान और कृतज्ञता का भाव रहेगा।
राज्यमंत्री ने गुरु और विद्यार्थी के संबंध को समझाते हुए कहा कि बच्चा जब मां के गर्भ में रहता है और जन्म के बाद लगभग पांच वर्ष की आयु तक उसका मस्तिष्क कोरे कागज की तरह होता है। माता-पिता अपने बच्चे के भविष्य की आधारशिला जरूर रखते हैं, लेकिन जब बच्चा प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश करता है, तब उसके व्यक्तित्व पर गुरुजनों के ज्ञान और संस्कारों की छाप पड़नी शुरू होती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उनके भीतर अनुशासन, संस्कार, जिम्मेदारी और समाज के प्रति कर्तव्य की भावना भी विकसित करते हैं। यही विद्यार्थी आगे चलकर शिक्षा ग्रहण करने के बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देते हैं। जब कोई विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त कर वटवृक्ष के समान समाज को छाया देने वाला बनता है तो उसमें उसके गुरुजनों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक क्षेत्र से लेकर विज्ञान, प्रशासन, न्याय, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों के जीवन में उनके गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चाहे कोई वैज्ञानिक बने, आईएएस, आईपीएस या पीसीएस अधिकारी बने अथवा राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में आगे बढ़े, उसके व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
समारोह में विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त शिक्षक भी मौजूद रहे। मंच पर पूर्व माध्यमिक विद्यालय नदियापुर हरदीपुर के अध्यापक पं. त्रिवेणी प्रसाद पाण्डेय, तिलकधारी महाविद्यालय के गणित शिक्षक डॉ. आरपी सिंह, श्रीरामजानकी दिनकर बालिका इंटर कॉलेज जमालापुर की पूर्व प्रधानाचार्य श्रीमती उर्मिला सिंह, पीएम श्री विद्यालय जमालापुर के पूर्व प्रधानाध्यापक आनंद कुमार मौर्य, जनार्दन प्रसाद अस्थाना, लहुरी राम, पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह और चेयरमैन श्रीमती मनोरमा मौर्या की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता सहकारी पीजी कॉलेज मिहरांवा के पूर्व प्राचार्य डॉ. सत्येंद्र प्रताप सिंह ने की, जबकि संचालन संतोष त्रिपाठी ने किया।
इस अवसर पर विजय लाल यादव, रामनाथ, डॉ. सेचू सिंह, तेज बहादुर सिंह, देवेन्द्र नाथ सिंह, कृष्ण कुमार सिन्हा, रामअछैवर पाण्डेय, संतोष सिंह, प्रो. अशोक सिंह रघुवंशी, विमला श्रीवास्तव, शकुंतला यादव, प्रताप नारायण गुप्ता, लक्ष्मी देवी, डॉ. उर्मिला सिंह, मनोरमा पाण्डेय, इंद्रा देवी गुप्ता, डॉ. निरूपा सिंह, डॉ. माधुरी सिंह, सुधा रानी, प्रमिला देवी, डॉ. अनीता त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समारोह में गुरुजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और उनके योगदान को स्मरण करते हुए शिक्षक दिवस की गरिमा को सार्थक किया गया।


