(आपके यहां इसे क्या कहते हैं? कभी खाए हैं क्या)
मानो तो तरकारी है,
हर सब्जी पर भारी है,
वर्षा ऋतु में लगते फल-
इंसानों से यारी है।
तन में शक्ति बढ़ाता है,
कई विटामिन लाता है,
रोग-डाक्टर दूर रहें –
जो इसको नित खाता है।
राज न कोई खोला है,
ये ताकत का गोला है,
कुछ कहते इसको खेसका
और कहीं कंटोला है।
एक नहीं दर्जन भर नाम,
करता है डाक्टर का काम,
कीकोड़ा,खेक्सा,काटोल-
कटारुवा ज्यों नाम तमाम।
कंकेड़ी या नाम ककोरा,
कहीं-कहीं पर कहें पड़ोरा,
इंग्लिश में स्पाइन यार्ड
फिर भी इसका नहीं निहोरा।
खूब आयरन और सोडियम,
भरा हुआ है मेंग्नीशियम,
पूरा फल प्रोटीन से भरा –
मिलता है इसमें पोटैशियम।
कच्चा है तो हरा-हरा है,
यहां विटामिन सी पसरा है,
ब्लड शूगर भी करे नियंत्रित –
कब्ज बेचारा डरा-डरा है।
सर्दी खांसी कम करता है,
यह बुखार तन से हरता है,
जड़ को पीस लगाओ सिर पर
दर्द बदन भर के हरता है।
हर लेवे दिल की बीमारी,
वजन कम करा दे तरकारी,
भरा विटामिन ए भी इसमें
चाहो तो हर ले बेकारी।
एन्टीआक्सीडेंट यहीं पर,
रामबाण है आज मही पर,
नहीं बुढ़ापा आने देता –
इसका सानी नहीं कहीं पर।
लता बाड़ पर भी चढ़ जाए,
धीरे-धीरे ये बढ़ जाए,
जो खेती इसकी करता है –
नई कहानी वो गढ़ जाए।
खेती करो कमाओ जी,
घर में खुशियां लाओ जी,
कंटोला खुद ही बोला –
खेसका खूब लगाओ जी।
सुरेश मिश्र
9869141831


