
ई-वेस्ट से फसलों की बीमारी रोकने का फॉर्मूला तैयार, शाहगंज की अनम फातिमा ने हासिल की बड़ी सफलता

जौनपुर। शाहगंज के बीबीगंज चौकी क्षेत्र के गोड़िला गांव की शोधार्थी अनम फातिमा ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) का उपयोग कर फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए एक प्रभावी जीवाणुनाशक फॉर्मूला तैयार किया है। तकनीक के सफल परीक्षण के बाद अब इसे पेटेंट कराने के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय भेजने की तैयारी है।
अनम फातिमा ने यह शोध उत्तराखंड के जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में किया है। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान और सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहयोग से हासिल हुई है। शोध रसायन विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. समीना महताब के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। प्रोजेक्ट में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. संदीप गुप्ता और डॉ. एमजी जैदी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अनम के अनुसार, इस तकनीक से एक साथ दो समस्याओं पर काम किया जा सकेगा। एक ओर खतरनाक इलेक्ट्रॉनिक कचरे का पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उचित तरीके से पुनर्चक्रण और उपयोग संभव होगा, वहीं दूसरी ओर किसानों को कम कीमत पर फसलों के रोगों से बचाव के लिए प्रभावी जीवाणुनाशक उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे खेती की लागत कम करने और पैदावार बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण परिवार से निकलकर विज्ञान के क्षेत्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाली अनम फातिमा की शैक्षणिक यात्रा भी उल्लेखनीय रही है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जौनपुर में हुई। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई सेंट थॉमस इंटर कॉलेज, शाहगंज से की। इसके बाद श्री विश्वनाथ पीजी कॉलेज, कलान से बीएससी और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से एमएससी की डिग्री हासिल की।
वर्तमान में अनम फातिमा जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से पीएचडी कर रही हैं। उनके शोध की जानकारी सामने आने के बाद गोड़िला गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने उनकी उपलब्धि को क्षेत्र के लिए गौरव की बात बताया है।








