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    महिलाओं के कानूनी अधिकारों पर जागरूकता शिविर आयोजित

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    मड़ियाहूं में महिलाओं, बच्चों और लोक अदालत के संबंध में दी गई जानकारी

    जौनपुर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश एवं जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर सुशील कुमार शशि के निर्देशन में गुरुवार को मड़ियाहूं तहसील सभागार और जगवन्ती गर्ल्स इंटर कॉलेज, जैयरामपुर रामनगर में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता सिविल जज सीडि./सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर सुशील कुमार सिंह ने की।

    शिविर में महिलाओं के कानूनी अधिकार, महिला सशक्तीकरण, महिला एवं बाल संरक्षण, राष्ट्रीय लोक अदालत, स्थायी लोक अदालत, केंद्र एवं राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बच्ची देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के संबंध में लोगों को विस्तार से जानकारी दी गई।

    सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुशील कुमार सिंह ने बच्ची देवी बनाम स्टेट ऑफ यूपी एवं अन्य मामले में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों और उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध जागरूकता और महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए कहा कि महिलाएं जागरूक होंगी तो परिवार, समाज और देश भी जागरूक होगा। उन्होंने लोगों से किसी भी कानूनी समस्या में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता लेने की अपील की।

    उन्होंने कहा कि समाज और देश की आवश्यकताओं के अनुरूप समय-समय पर कानूनों में परिवर्तन और संशोधन होते रहते हैं। शिविर में बच्चों के अधिकार, स्थायी लोक अदालत और उससे संबंधित विधिक सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने संबंधित टोल फ्री नंबरों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

    सचिव ने व्यक्तिगत बंदियों की सामाजिक एवं आर्थिक रिपोर्ट के संबंध में भी जानकारी देते हुए कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित न्यायालय द्वारा बंदी की जमानत प्रक्रिया को मानवीय एवं संवैधानिक दृष्टिकोण से त्वरित गति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है। उन्होंने आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक विवादों का सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारण कराने की अपील की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से कराया जाता है तथा निर्धारित मामलों में कोर्ट फीस की वापसी का भी प्रावधान है।

    पैनल अधिवक्ता देवेंद्र कुमार यादव ने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों तथा महिला सशक्तीकरण के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों को संविधान एवं कानूनों के तहत व्यापक सुरक्षा प्रदान की गई है। उन्होंने महिलाओं की गिरफ्तारी, बच्चों को खतरनाक कार्यों में लगाए जाने, समान कार्य के लिए समान वेतन और मातृत्व अवकाश सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के बारे में बताया।

    उन्होंने कहा कि महिलाओं को विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से जरूरत के अनुसार हर संभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ महिलाओं को जागरूक और दृढ़ संकल्पित होने का आह्वान किया। साथ ही टेली-लॉ के माध्यम से उपलब्ध विधिक सहायता के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

    तहसीलदार मड़ियाहूं रवि रंजन कश्यप ने महिलाओं और बच्चों के लिए शासन एवं प्रशासन द्वारा संचालित सहायता और सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रशासन, विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जरूरतमंद लोगों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    थाना प्रभारी मड़ियाहूं ने भी महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस की ओर से उपलब्ध सहायता एवं सुविधाओं के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने लोगों से किसी भी समस्या की स्थिति में पुलिस एवं संबंधित विभागों से संपर्क करने तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

    शिविर के दौरान उपस्थित लोगों को महिलाओं एवं बच्चों के अधिकारों, कानूनी सहायता, सरकारी योजनाओं और विवादों के वैकल्पिक समाधान के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में तहसील के अधिकारी एवं कर्मचारी, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा अन्य लोग उपस्थित रहे।

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