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    10 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्राम रोजगार सेवकों का प्रदर्शन, नियमितीकरण की उठाई मांग

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    जौनपुर। उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के बैनर तले सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में सैकड़ों ग्राम रोजगार सेवकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण चौरसिया के नेतृत्व में रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित 10 सूत्रीय ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट इंद्र नंदन सिंह को सौंपा।

    प्रदर्शन के दौरान रोजगार सेवकों ने प्रदेश के 36 हजार संविदा ग्राम रोजगार सेवकों का नियमितीकरण कर उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग प्रमुखता से उठाई। उनका कहना था कि वर्ष 2006 से मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायतों में सेवाएं देने के बावजूद उनका भविष्य अब भी असुरक्षित बना हुआ है।

    रोजगार सेवकों ने बताया कि वर्तमान में उनका मानदेय मनरेगा योजना के प्रशासनिक मद से दिया जाता है, लेकिन ग्राम पंचायतों की भौगोलिक परिस्थितियों और कार्यभार में अंतर होने के कारण समय पर भुगतान नहीं हो पाता। उन्होंने नियमित और समयबद्ध मानदेय भुगतान के लिए अलग बजट की व्यवस्था किए जाने की मांग की।

    ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम रोजगार सेवक केवल मनरेगा ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनके जॉब चार्ट में केवल मनरेगा कार्य शामिल है। उन्होंने मुख्यमंत्री की 4 अक्टूबर 2021 की घोषणा का हवाला देते हुए जॉब चार्ट में अन्य विभागीय कार्यों को भी शामिल करने की मांग की।

    संघ ने रोजगार सेवकों के लिए मानव संसाधन नीति (एचआर पॉलिसी) लागू करने तथा न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित करने की मांग भी उठाई। साथ ही मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ग्राम रोजगार सेवक को पद से हटाने की प्रक्रिया में ग्राम पंचायत सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत के स्थान पर ग्राम सभा के दो-तिहाई बहुमत की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।

    रोजगार सेवकों ने बताया कि प्रदेश में कई स्थानों पर उनका 12 से 14 माह का मानदेय बकाया है, जिससे वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने तत्काल बकाया भुगतान की मांग करते हुए कहा कि आर्थिक तंगी के कारण परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करना कठिन हो गया है।

    ज्ञापन में उच्च गुणवत्ता वाले एंड्रॉयड मोबाइल फोन और डाटा रिचार्ज उपलब्ध कराने, 20 दिन का आकस्मिक अवकाश और 12 दिन का चिकित्सा अवकाश देने, न्याय पंचायत स्तर पर स्थानांतरण व्यवस्था लागू करने तथा मृतक आश्रितों को सेवा में समायोजित करने की भी मांग की गई।

    इसके अलावा, रोजगार सेवकों ने ग्राम स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाओं में अपनी भूमिका और अधिक प्रभावी बनाने तथा उन्हें विभागीय कर्मी घोषित किए जाने की मांग भी रखी। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहे।

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