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    उपेक्षा का शिकार बनीं महापुरुषों की प्रतिमाएं, अधूरे निर्माण और बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल

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    जौनपुर। केराकत नगर के प्रमुख चौराहों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाएं और राष्ट्रीय प्रतीक इन दिनों उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं। कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जबकि प्रतिमाओं के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की समुचित व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है। नगर के सामाजिक और बौद्धिक वर्ग के लोगों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए संबंधित विभागों से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।

    नगर के सिहैली चौराहे पर स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का चबूतरा लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है। प्रतिमा खुले आसमान के नीचे स्थापित है और उसके ऊपर सुरक्षा के लिए किसी प्रकार का शेड नहीं लगाया गया है। प्रतिमा के आसपास निर्माण सामग्री बिखरी हुई है तथा कई स्थानों पर अधूरा कार्य साफ दिखाई देता है, जिससे स्थल की गरिमा प्रभावित हो रही है।

    इसी प्रकार कोतवाली चौराहे पर स्थापित राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ का शिल्प कार्य भी अब तक पूरा नहीं हो सका है। रखरखाव और संरक्षण के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय महत्व के प्रतीक के प्रति इस तरह की उदासीनता चिंता का विषय है।

    वहीं सरायबीर चौराहे पर स्थापित शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा के आसपास भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। यहां बैरिकेडिंग और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन उसे पूरा नहीं कराया गया। परिणामस्वरूप प्रतिमा स्थल की सुंदरता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।

    गौरतलब है कि ये तीनों स्थल नगर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण चौराहों में शामिल हैं, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रतिमाओं के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा कराने के लिए अपेक्षित पहल नहीं की गई है।

    इस संबंध में प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के आसपास अधूरा निर्माण कार्य उचित नहीं है। ऐसे स्थलों की नियमित देखरेख और संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को अपने महापुरुषों के प्रति सम्मान का संदेश मिल सके।

    अधिवक्ता अनिल सोनकर गांगुली ने कहा कि नगर की पहचान माने जाने वाले प्रमुख चौराहों की बदहाल स्थिति बाहर से आने वाले लोगों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

    रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष मनोज कमलापुरी ने कहा कि अशोक स्तंभ जैसे राष्ट्रीय प्रतीक की उपेक्षा अत्यंत गंभीर विषय है। संबंधित विभाग को प्राथमिकता के आधार पर अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा कराना चाहिए तथा प्रतिमाओं के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल स्मारक नहीं बल्कि समाज को प्रेरणा देने वाले प्रतीक हैं। ऐसे में उनकी उपेक्षा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि महापुरुषों के प्रति सम्मान की भावना को भी आहत करती है। नागरिकों ने नगर प्रशासन और संबंधित विभागों से शीघ्र हस्तक्षेप कर इन स्थलों की स्थिति सुधारने की मांग की है।

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