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    गरीबो और दिव्यांगों की सेवा करके बरिष्ठ समाजसेवी ज्ञानप्रकाश ने मनाया अपना जन्मदिन

    BySatyameva Jayate News

    Sep 25, 2023
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    जौनपुर। जब विश्व की विनाशक प्रलयंकारी शक्तियाँ सृष्टि के समूल को सागर की लहरों की तरह अपनी आगोश में डुबोकर मार डालना चाहती हो, तब किसी मनु द्वारा अपनी मजबूत इच्छा शक्ति की नौका पर जीव मात्र की रक्षा के लिए जीवन रक्षक संसाधनों द्वारा किया गया प्रयास ही मनु सामर्थ्य कहा जाता है।

    ऐसे ही कोरोना संक्रमण काल में समाजसेवी एवं प्रमुख उद्योगपति ज्ञानप्रकाश सिंह द्वारा जौनपुर जनपद में गरीब, बेसहारो के जीवन रक्षा हेतु निःस्वार्थ एवं उन्मुक्त भाव से सेवा कार्य निरन्तर जारी है।

    वैसे तो जन्मदिन सभी के लिए एक उत्सव का दिन होता है। लेकिन जब लोकव्यवहार में समाज के लिए सही अर्थो में जीवन सौपने वाले महापुरुषों का जन्मदिवस हो तो सम्पूर्ण समाज से आशीष मिलने लगता है।

    ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के जन्मदिवस पर शुभेक्षुओं द्वारा बधाइयों का ताँता लग गया।

    लेकिन “मन मस्त मगन बैरागी है” के धुन में समाजसेवा को ही अपना लक्ष्य मानने वाले ज्ञान प्रकाश सिंह का जन्मदिवस भी जनपद में मिसाल बन गया।

    जब उन्होंने दिव्यांग के घर पहुंचकर आर्थिक सहायता देने के साथ साथ भविष्य में कृत्रिम अंग लगवाने का आश्वासन भी दिया, तो दिव्यांग के परिजनों के रोम रोम से आशीषरूपी अश्रु धारा फूट उठी।

    अपने जन्मदिन पर ज्ञानप्रकाश सिंह को माता चौकियां धाम में दर्शन पूजन के दौरान पता चला कि ईशापुर मोहल्ला निवासी प्रभुनाथ खरवार पुत्र अमरपाल खरवार नामक युवक का एक—हाथ व पैर पूरी तरह से खराब हो चुका है।

    वह अपने पैरों पर चलने की पूरी उम्मीद खो चुका है। श्री सिंह ने ईशापुर पहुंचकर उस युवक के परिजन को 50 हजार की मदद करते हुये युवक का कृत्रिम हाथ व पैर लगवाने की बात कही।

    इस बारे में पूछे जाने पर ज्ञानप्रकाश सिंह ने कहा कि जनपद का हर नागरिक मेरा सहोदर है, मुझे जब भी मौक़ा मिलता है अपने लोगो के बीच पहुंचने का प्रयास करता हूँ।

    समाजसेवा पर पूछे जाने के बाद उन्होंने कहा कि जब जनपद का हर नागरिक मेरा सहोदर है तब मै किसी की मदद अपना फर्ज समझकर करता हूँ, भाई की भाई मदद नहीं करता, अपना फर्ज निभाता है। परिवार की कल्पना ही सामूहिक जीवन से है और समस्त जौनपुर मेरा परिवार ही तो है।

    उन्होंने आगे कहा कि मुझे जौनपुर के लिए मरने का मौका नहीं मिला, लेकिन मुझे अपने जनपद के लिए जीने का मौका मिला है, और मेरा यह जीवन जनपदवासियो के काम आये यही मेरे प्रयासों की सार्थकता है।

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