
भगवान के मुख से निकली वाणी ही श्रीमद्भागवत कथा : पं. रजनीकांत द्विवेदी

कथाव्यास ने भक्तों को बताया भक्ति और कर्म का महत्व
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन उमड़े श्रद्धालु, भक्ति की महिमा का किया वर्णन
जौनपुर। नगर के विवाह मैरेज लॉन में शुक्रवार से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने श्रीमद्भागवत कथा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान के मुख से निकली हुई वाणी ही भागवत कथा है। उन्होंने कहा कि जिस दिन से इस कथा के आयोजन की तिथि निर्धारित हुई, उसी दिन से यह स्थान पवित्र तीर्थस्थल बन गया। कथा की मुख्य यजमान विमला सेठ हैं। आयोजन के पहले दिन श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक संदेश प्राप्त किया।
कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने भक्तों की श्रेणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान के भक्त तो सभी होते हैं, लेकिन उनकी भक्ति के भाव और स्वरूप अलग-अलग होते हैं। उन्होंने बताया कि भक्तों की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। पहली श्रेणी में भगवान के स्वरूप का पूजन करने वाले भक्त आते हैं। दूसरी श्रेणी में भगवान की प्रतिमा का पूजन करने वाले भक्त शामिल हैं, जबकि तीसरी श्रेणी के भक्त हर जीव में भगवान का दर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति का भाव केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक जीव में परमात्मा की उपस्थिति को अनुभव करना भी भक्ति का महत्वपूर्ण स्वरूप है।
पं. रजनीकांत द्विवेदी ने कर्मों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीव को अपने कर्मों के अनुसार योनि प्राप्त होती है। बड़े पुण्य और प्रताप से मानव जीवन मिलता है। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन का सदुपयोग करते हुए अच्छे कर्म करने चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में सदाचार, सेवा, सद्भाव और भक्ति का विशेष महत्व है। मनुष्य को अपने आचरण और विचारों को श्रेष्ठ बनाकर जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए।
कथाव्यास ने श्रीमद्भागवत कथा की विशेषता बताते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से कथा सुनने के लिए पंडाल में पहुंचता है, तो वह संसार के जंजाल से दूर होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करता है। भागवत कथा मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराती है और उसे भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कथा श्रवण से व्यक्ति के मन में सकारात्मक विचारों का संचार होता है तथा उसे अपने कर्तव्यों और कर्मों के प्रति सजग रहने का संदेश मिलता है।

कथा शुरू होने से पहले विवेक सेठ मोनू ने व्यासपीठ की आरती उतारी। इसके बाद कथाव्यास ने भागवत कथा का प्रवचन किया। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, सद्कर्म और आध्यात्मिक जीवन के महत्व का संदेश दिया गया। इस मौके पर विनीत सेठ, विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ, विपिन सेठ समेत गठना कोठी परिवार व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।







